पहली बार होगा इनलैंड फिशिंग हार्बर का विकास : सचिव

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नई दिल्ली: केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में सचिव अतुल चतुर्वेदी ने गुरुवार को कहा कि देश के भीतरी हिस्से में मछली पालन (इनलैंड फिशरीज) के क्षेत्र में पहली बार इनलैंड फिशिंग हार्बर का विकास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री (निर्मला सीतारमण) ने बजट की घोषणा में इनलैंड फिशरीज पर जोर दिया है।

अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि देश के भीतर गंगा और ब्रह्मपुत्र समेत अन्य नदियों और कैनालों में मछली पकड़ने वाले मछुआरों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्च र तैयार किए जाने से उनको फायदा होगा और नमामि गंगे से अर्थगंगा का प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) का सपना साकार होगा।

मंत्रालय के लिए बजट में किए गए प्रावधानों के संबंध में यहां संवाददाताओं से बातचीत में चतुर्वेदी ने कहा, वित्तमंत्री ने अपने मत्स्यपालन विभाग के लिए वित्तवर्ष 2021-22 के बजट में 1,220.84 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की है, जोकि पिछले वित्तवर्ष 2020-21 से 34 फीसदी अधिक है और अब तक का सबसे ज्यादा आवंटन है।

इसमें मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई)के लिए 1,000 करोड़ रुपये का आवंटन भी शामिल है जोकि पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 43 फीसदी अधिक है।

उन्होंने कहा कि मॉर्डन फिशिंग हार्बर और लैंडिंग सेंटरों के लिए भारी निवेश आम बजट 2021-22 की काफी अहम घोषणाएं हैं।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में पांच फिशिंग हार्बर विकसित किए जाने की घोषणा की है जो कोच्चि, चेन्नई, विशाखापत्तनम, पारादीप और पेटुआघाट में होंगे। चतुर्वेदी ने कहा कि ये फिशिंग हार्बर आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि ये पांचों फिशिंग हार्बर और लैंडिंग सेंटर अत्याधुनिक ढांचागत संरचनाओं व सुविधाओं से लैस होंगे और इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 40,000 से 50,000 लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

चतुर्वेदी ने कहा कि मत्स्यपालन को अर्थव्यवस्था के उभरते हुए क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें बीते पांच साल के दौरान दोहरे अंकों की वृद्धि दर दर्ज की गई है। मत्स्यपालन की औसत वार्षिक विकास दर 2014-15 के बाद से 10.87 फीसदी रही है।

उन्होंने बताया कि वित्तवर्ष 2019-20 में मछली का उत्पादन रिकॉर्ड 142 लाख टन रहा और आगे इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। मत्स्यपालन से देश की 2.8 करोड़ से अधिक आबादी अपनी आजीविका चलाती है।

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