103 एकड़ जमीन विवाद, फर्जी जमाबंदी मामले में हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत

Archana Ekka
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Bokaro: बोकारो जिले के चास प्रखंड के तेतुलिया गांव में 103 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़े मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई। इस मामले में दो आरोपियों की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत ने सुनवाई करते हुए फिलहाल अंतरिम राहत को बरकरार रखा है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 16 फरवरी तय की है।

 सीआईडी की रिपोर्ट पहले से दाखिल

इस केस में सीआईडी की ओर से पहले ही जवाब दाखिल किया जा चुका है। वहीं, आरोपियों शैलेश कुमार सिंह और विमल कुमार अग्रवाल की ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी दी गई है। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति की अदालत में हुई, जहां फिलहाल राहत जारी रखने का फैसला लिया गया।

अगली सुनवाई की तारीख तय

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तारीख निर्धारित की है। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में अपना पक्ष रखा। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से जवाब देने के लिए समय मांगा गया है।

 क्या है पूरा जमीन विवाद

बताया गया कि यह मामला जमीन पर अवैध कब्जा और फर्जी तरीके से जमाबंदी कराने से जुड़ा है। इस संबंध में सीआईडी ने कांड संख्या 4/2025 दर्ज किया है। आरोप है कि वर्ष 2012 में गलत तरीके से इस जमीन की जमाबंदी कर दी गई थी।

जमीन का पुराना इतिहास

जानकारी के अनुसार, सरकार ने यह जमीन पहले बोकारो इस्पात संयंत्र को सतनपुर और तेतुलिया की पहाड़ियों और वन भूमि के रूप में दी थी। लेकिन संयंत्र द्वारा इस जमीन का उपयोग नहीं किया गया, जिससे यह जमीन लंबे समय तक खाली पड़ी रही। वर्ष 1980 और 2013 में इसका रीजनल सर्वे भी प्रकाशित हुआ था, लेकिन करीब 33 वर्षों तक किसी ने इस जमीन पर दावा नहीं किया।

 फर्जी दस्तावेजों से जमाबंदी का आरोप

बाद में बोकारो इस्पात संयंत्र ने यह जमीन वन विभाग को लौटा दी थी। आरोप है कि इसके बावजूद वर्ष 2012 में तत्कालीन अंचल अधिकारी ने फर्जी कागजात के आधार पर 103 एकड़ जमीन की जमाबंदी कर दी। जब यह मामला सामने आया, तो जांच के बाद सरकार ने संबंधित अंचल अधिकारी को बर्खास्त कर दिया।

 कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में एसडीओ, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अंचल निरीक्षक और राजस्व कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और आगे की सुनवाई के बाद स्थिति और साफ होने की उम्मीद है।

यह मामला जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और सरकारी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।