पेपर लीक मामला, JSSC और आउटसोर्सिंग कंपनी के बीच सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद

Archana Ekka
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Ranchi : रांची में साल 2022 की जूनियर इंजीनियर परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में आरोपी आउटसोर्सिंग कंपनी को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने का आदेश दिया गया था। हालांकि, इस आदेश को झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल किए जाने को चुनौती देते हुए JSSC की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

 क्या है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि वर्ष 2024 में पुलिस ने दोबारा रिपोर्ट दी थी, जिसमें यह कहा गया था कि पेपर लीक से जुड़े आरोप सही पाए गए हैं। वहीं, आयोग की ओर से यह भी बताया गया कि आउटसोर्सिंग कंपनी को परीक्षा एजेंसी के तौर पर हटाया गया, इसलिए उसका बिल भुगतान नहीं किया जा सकता।

 परीक्षा रद्द होने की जानकारी

आयोग ने अदालत को बताया कि जूनियर इंजीनियर की परीक्षा 3 जुलाई 2022 को ली गई थी। बाद में पेपर लीक और पुलिस जांच के बाद 25 जुलाई 2022 को यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसी को आधार बनाकर एजेंसी को आगे की प्रक्रिया से बाहर किया गया।

 अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल अवमानना याचिका की कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही, आरोपी कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में JSSC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और अन्य वकीलों ने पक्ष रखा।

 हाईकोर्ट का पुराना आदेश

इससे पहले 26 जून 2025 को हाईकोर्ट ने झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर लीक मामले में JSSC के आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि केवल पुलिस रिपोर्ट के आधार पर किसी कंपनी को आजीवन ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता। साथ ही आयोग पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

 भुगतान और सिक्योरिटी मनी पर निर्देश

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि कंपनी के बिल का भुगतान 7 प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए। अगर कंपनी की सिक्योरिटी मनी जब्त की गई है, तो उसे भी वापस किया जाए।

क्यों बढ़ा विवाद

आउटसोर्सिंग कंपनी ने JSSC के ब्लैकलिस्ट आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आयोग का कहना था कि पुलिस रिपोर्ट में एजेंसी की संलिप्तता स्पष्ट थी, इसलिए यह कार्रवाई की गई। अब यही मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

यह मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानूनी प्रक्रिया कितनी लंबी और जटिल हो सकती है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।