

रांची: झारखंड सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार, 2 फरवरी 2026 को झारखंड के महामहिम राज्यपाल संतोष गंगवार से मिला। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्य कमेटी सदस्य सह रांची जिला अध्यक्ष मो. शकील ने किया। मुलाकात के दौरान राज्यपाल को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया और सहायक अध्यापकों से जुड़ी प्रमुख समस्याओं से उन्हें अवगत कराया गया।





22–23 वर्षों से सेवा, फिर भी समाधान नहीं
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि झारखंड में लगभग 55 हजार पारा शिक्षक बीते 22 से 23 वर्षों से सुदूर और कठिन क्षेत्रों में शिक्षा का कार्य कर रहे हैं। वे लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन भी करते रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। अन्य राज्यों में पारा शिक्षकों को वेतनमान मिल चुका है, जबकि झारखंड में वे आज भी कम मानदेय में काम करने को मजबूर हैं।
समान काम के बदले समान वेतन की मांग
प्रतिनिधियों ने कहा कि पारा शिक्षक सरकारी शिक्षकों के समान ही सभी शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में “समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए राज्यपाल से पहल करने का आग्रह किया गया।
1700 सहायक अध्यापकों का मानदेय रोके जाने का मुद्दा
मांग पत्र में यह भी बताया गया कि राज्य में करीब 1700 सहायक अध्यापकों का मानदेय फर्जी बोर्ड या संस्थान का हवाला देकर रोक दिया गया है। जबकि उसी बोर्ड से प्रमाण पत्र लेकर शिक्षा विभाग में अन्य शिक्षक कार्यरत हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एक ही विभाग में दो अलग-अलग नियमों पर सवाल उठाते हुए रोके गए मानदेय के शीघ्र भुगतान की मांग की गई।
राज्यपाल का सकारात्मक आश्वासन
सभी बातों को सुनने के बाद राज्यपाल ने आवेदन पढ़कर मुख्यमंत्री से जल्द इस विषय पर चर्चा करने और सेवा शर्तों की समीक्षा कर पत्र लिखने की बात कही। प्रतिनिधिमंडल को समस्या समाधान के लिए सकारात्मक आश्वासन मिला।
प्रतिनिधिमंडल में मो. शकील (भाईजान), विनोद राम और परवेज अख्तर शामिल थे। यह जानकारी झारखंड सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा, रांची की ओर से दी गई।
