
High Court strict on Demand for Better Treatment: प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) के सुप्रीमो दिनेश गोप के बेहतर इलाज को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्वास्थ्य को गंभीर मानते हुए जेल प्रशासन को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। Court का कहना है कि इलाज में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट का जेल अधीक्षक को निर्देश
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति Gautam Kumar Chaudhary की अदालत ने मेदिनीनगर जेल अधीक्षक को आदेश दिया है कि दिनेश गोप का बेहतर इलाज एम्स दिल्ली में कराने के लिए जल्द कार्रवाई की जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में तेजी दिखाना जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य को और नुकसान न पहुंचे।
दो सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट
कोर्ट ने जेल अधीक्षक से दो सप्ताह के भीतर दिनेश गोप के इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी देने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को तय की गई है।
इससे पहले जेल अधीक्षक की ओर से 30 जनवरी को भेजे गए पत्र का भी कोर्ट में जिक्र हुआ, जिसमें बताया गया था कि एम्स में इलाज के लिए डॉक्टरों से Appointment नहीं मिल पा रहा है, हालांकि प्रयास लगातार जारी हैं।
स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने की बात
याचिकाकर्ता की ओर से Court को बताया गया कि बेहतर इलाज न मिलने के कारण दिनेश गोप की हालत लगातार खराब हो रही है। उन्हें एम्स में इलाज की सख्त जरूरत है।
बताया गया कि मई 2025 में भी उन्हें एम्स भेजने की बात हुई थी, लेकिन उस समय यह संभव नहीं हो सका था।
रिम्स में इलाज संभव नहीं
जानकारी के अनुसार रिम्स के डॉक्टरों की समिति ने भी यह राय दी है कि दिनेश गोप का इलाज RIMS में संभव नहीं है। समिति ने साफ कहा है कि उन्हें उच्च स्तर के इलाज के लिए एम्स दिल्ली भेजा जाना चाहिए।
गिरफ्तारी और जेल से जुड़ा मामला
बताया गया कि दिनेश गोप के हाथ में चोट लगी थी, जिसके बाद उनका ऑपरेशन हुआ। इलाज के दौरान न्यूरो से जुड़ी समस्या भी सामने आई।
दिनेश गोप को झारखंड पुलिस और एनआईए की संयुक्त टीम ने नेपाल से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रांची जेल में रखा गया, जहां से बाद में मेदिनीनगर जेल भेजा गया।
इस पूरे मामले में अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो सकेगा कि इलाज को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

