राज्य कर्मचारियों के 100 से अधिक मेडिकल क्लेम खारिज, बीमा कंपनी पर सवाल

Archana Ekka
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रांची: झारखंड में राज्य सरकार के कर्मचारियों के इलाज से जुड़े 100 से अधिक मेडिकल क्लेम बीमा कंपनी ने खारिज कर दिए हैं। इन दावों में फ्रैक्चर, कैंसर, डायलिसिस, हार्ट अटैक, पित्त की थैली में पथरी सहित कई गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च शामिल है। यह मामला तब सामने आया जब वित्तीय वर्ष 2025–26 से लागू राज्य सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कर्मचारियों ने इलाज के बाद मेडिकल क्लेम दाखिल किए, लेकिन बीमा कंपनी ने इन दावों को अस्वीकार कर दिया।

कई कर्मचारियों के क्लेम हुए खारिज

जिन कर्मचारियों के इलाज से जुड़े दावे खारिज हुए हैं, उनमें नंद किशोर साव, शकुंतला लाल, आशुरी रंजन, मुंशी तिर्की, बिरेंद्र कुमार सिंह, सुनील कुमार वर्मा, समीर कुमार मिश्रा सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल हैं। क्लेम खारिज होने के बाद कर्मचारी परेशान और असमंजस की स्थिति में हैं।

बीमा कंपनी ने पॉलिसी शर्तों का दिया हवाला

बीमा कंपनी टाटा एआईजी का कहना है कि जिन बीमारियों और इलाज के लिए दावा किया गया, वे उनकी बीमा पॉलिसी की शर्तों में शामिल नहीं हैं। इसी कारण इन मेडिकल क्लेम को अस्वीकार किया गया है।

सूचीबद्ध अस्पतालों में ही है कैशलेस सुविधा

राज्य सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कर्मचारियों को सूचीबद्ध (एम्पैनल्ड) अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई है।

हालांकि कई कर्मचारियों ने सूचीबद्ध अस्पतालों के बजाय अन्य अस्पतालों में इलाज कराया। ऐसे मामलों में इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति (रीइम्बर्समेंट) के लिए किए गए दावों को बीमा कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे पॉलिसी की शर्तों के दायरे में नहीं आते।

कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

मेडिकल क्लेम खारिज होने के बाद राज्य के कई कर्मचारी आर्थिक परेशानी और असमंजस का सामना कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि गंभीर बीमारियों के इलाज के बावजूद यदि बीमा कंपनी दावे खारिज करती है, तो स्वास्थ्य बीमा योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होता है।

 

 

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