
लातेहार : झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर प्रतिबंधित जे.जे.एम.पी. (JJMP) संगठन का 5 लाख रुपये का इनामी उग्रवादी सुरेंद्र लोहरा उर्फ विनोद लोहरा ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। गुरुवार को उन्होंने पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों के सामने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इस कदम को सुरक्षा एजेंसियों की रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि लगातार दबाव और पुनर्वास योजनाओं के कारण अब उग्रवादी मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं, जिससे पलामू-लेतेहार क्षेत्र में शांति और स्थिरता और मजबूत होगी।
लंबे समय से सक्रिय था उग्रवादी
पुलिस के अनुसार, सुरेंद्र लोहरा लंबे समय से जे.जे.एम.पी. संगठन के लिए सक्रिय था और कई उग्रवादी गतिविधियों में शामिल रहा। सरकार ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। लगातार सर्च ऑपरेशन और सुरक्षा बलों के दबाव के चलते उसकी गतिविधियां सीमित हो रही थीं और संगठन के भीतर उसकी स्थिति कमजोर पड़ गई थी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की “नई दिशा” पुनर्वास नीति ने सुरेंद्र लोहरा के आत्मसमर्पण में अहम भूमिका निभाई। इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और समाज में पुनर्स्थापना का मौका दिया जाता है। लोहरा ने भी इसी नीति से प्रभावित होकर हिंसा छोड़ने और सामान्य जीवन अपनाने का निर्णय लिया।
अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण
लातेहार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सुरेंद्र लोहरा ने पलामू के आईजी, सीआरपीएफ अधिकारियों और जिला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इस दौरान अधिकारियों ने उसे सम्मान के साथ मुख्यधारा में वापसी का संदेश दिया। पुलिस ने कहा कि सरकार की नीति के तहत उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा दी जाएगी। सुरेंद्र लोहरा का यह आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और इसे क्षेत्र में शांति प्रक्रिया को गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

