
Ranchi Water Crisis : रांची में पेयजल संकट एक बार फिर गंभीर होता नजर आ रहा है। शहर की बहुप्रतीक्षित शहरी जलापूर्ति योजना, जो वर्षों से निर्माणाधीन है, विभागीय देरी और तकनीकी अड़चनों के कारण अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
वर्ष 2019 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य राजधानी के हर घर तक नियमित और पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित करना था। योजना का पहला चरण लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है, लेकिन अंतिम 10 प्रतिशत काम लंबे समय से अटका हुआ है। इसी वजह से योजना की डेडलाइन पहले 2024 से बढ़ाकर 2025 और फिर 2026 कर दी गई, लेकिन अब भी इसके पूरा होने पर संशय बना हुआ है।
परियोजना के तहत केवल तिलता मोड़ से पिस्का मोड़ तक लगभग 10 किलोमीटर राइजिंग लाइन बिछाई जानी बाकी है। इस कार्य के लिए सड़क की खुदाई आवश्यक है, लेकिन इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिल पाया है। इसी कारण पूरा काम ठप पड़ा हुआ है।
इस देरी की वजह से जुडको (नोडल एजेंसी) पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वह समय पर बाधाओं को दूर करने में सफल नहीं हो पा रही है। नतीजतन, पूरी योजना का लाभ अभी तक आम लोगों तक नहीं पहुंच सका है।
दूसरी ओर, शहर की मौजूदा जल आपूर्ति व्यवस्था भी पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों पर निर्भर है। रूक्का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और 54 साल पुराना पाइपलाइन नेटवर्क अब लगातार समस्याएं पैदा कर रहा है। पाइपलाइन में लीकेज और बार-बार फटने की घटनाओं के कारण कई इलाकों में दो से तीन दिनों तक पानी की आपूर्ति बाधित हो जाती है।
गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब पानी की मांग तेजी से बढ़ जाती है और सप्लाई कम पड़ जाती है।
शहर के कई इलाके जैसे रातू रोड, हरमू, पिस्का मोड़, कांके रोड, किशोरगंज, आनंद नगर, मधुकम और पहाड़ी टोला को ड्राई जोन माना जाता है। इन क्षेत्रों में भूजल स्तर भी तेजी से गिरता है, जिससे बोरिंग तक सूखने लगती हैं।
इन इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह शहरी जलापूर्ति योजना पर निर्भर हैं। ऐसे में योजना में हो रही देरी सीधे तौर पर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई जलापूर्ति योजना समय पर पूरी हो जाती, तो रांची के लाखों लोगों को जल संकट से राहत मिल सकती थी। फिलहाल स्थिति यह है कि लोग हर गर्मी में बढ़ती परेशानी के बीच सिर्फ बेहतर व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं।

