बंगाल में भयमुक्त और निष्पक्ष मतदान हुआ तभी भाजपा की संभावना, नहीं तो फिर से दीदी

पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला पहले चरण के मतदान के बीच ममता बनर्जी की रणनीति और बीजेपी की चुनौतियों पर सियासी चर्चा तेज

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सुनील सिंह

पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान आज है। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा. परिणाम क्या होगा यह तो 4 मई को ही पता चलेगा। लेकिन इस बार दीदी को भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है। यदि यहां निष्पक्ष व भयमुक्त चुनाव हुआ और मतदाता वोट देने के लिए घरों से निकले तभी भाजपा की संभावना बनेगी नहीं तो दीदी फिर से सत्ता में आएगी। बंगाल में निष्पक्ष चुनाव कराना बड़ी चुनौती है। इस बार चुनाव आयोग ने पूरी व्यवस्था की है, बावजूद निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव की संभावना कम ही है। क्योंकि टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने घर-घर यह बात फैला दी है कि यदि टीएमसी को वोट नहीं दिया तो चुनाव बाद निपट लेंगे। केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान कितने दिनों तक तक रहेंगे। इसके पहले चुनाव बाद हिंसा सुर्खियों में रही है। इस कारण ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। ऐसी स्थिति में नहीं लगता है कि भयमुक्त मतदान होगा।

बंगाल में कड़ी टक्कर के बावजूद दीदी का पलड़ा भारी है। खासकर के ग्रामीण इलाकों में और यहीं से परिणाम भी निकलेगा। टीएमसी की जड़ पिछले 10 वर्षों में काफी मजबूत हो चुकी है। टीएमसी के मुकाबले भाजपा का संगठन कमजोर है। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का भी असर मतदाताओं पर है। हालांकि,भाजपा ने भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सबसे बड़ा चुनाव चुनावी मुद्दा बंगाली अस्मिता है। वह इस बात को अपने लोगों तक पहुंचने में सफल रही हैं कि भाजपा बाहरी पार्टी है। यह भी कह रही है कि अगर भाजपा जीत गई तो बंगाली अस्मिता खतरे में पड़ जाएगी। गुजरात के लोग हावी हो जाएंगे।

यह हथियार काम करता दिख रहा है। हालांकि यह सिर्फ नॉरेटिव है। चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवार बंगाल के ही हैं। लेकिन मोदी और अमित शाह को गुजराती बता करके दीदी ने चतुराई दिखाई है। इसीलिए तमाम विरोध के बावजूद ममता दीदी का पलड़ा भारी है। बावजूद यदि निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान हुआ तो बाजी पलट जाएगी। भाजपा ने भी इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई है। हर कोशिश की है। इसलिए दीदी पहली बार इतनी परेशानी में हैं। बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस का जनाधार खत्म हो जाना भी दीदी के लिए वरदान साबित हुआ है। टीएमसी की सीधी लड़ाई भाजपा से है। सीधी लड़ाई में भाजपा कमजोर पड़ जाती है। जहां भी त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला होता है वहां बीजेपी को लाभ मिलता है। बंगाल में अधिकांश सीटों पर सीधा मुकाबला भाजपा के लिए नुकसानदेह और टीएमसी के लिए लाभकारी हो सकता है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।