बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार और उपेंद्र कुशवाहा!

बिहार मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सम्राट चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा को लेकर सियासी चर्चाएं तेज, पटनिया मीडिया के नैरेटिव पर सवाल उठे।

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विवेकानंद कुशवाहा

बिहार में छह मई तक मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाने की चर्चा है। इस दौरान पटनिया मीडिया यह नेरेटिव बनाने में जुटी है कि सम्राट चौधरी जब मुख्यमंत्री बन ही गये है तो भाजपा को अब उपेंद्र कुशवाहा की क्या जरूरत है? खबर यह भी चलायी जा रही है कि भाजपा उपेंद्र जी को अपनी पार्टी का विलय भाजपा में करने के लिए दबाव बना रही है, आदि-इत्यादि। इसी पटनिया मीडिया के कुछ लोग कुछ दिन पहले तक यह कह कर धनिया बो रहे थे कि जब उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेज ही दिया, तो अब सम्राट चौधरी को भाजपा बिहार का मुख्यमंत्री क्यों बनायेगी? कुल मिलाकर बिना किसी ठोस इनपुट के ये लोग अपनी जातीय पूर्वाग्रह के आधार पर नेरेटिवबाजी कर एजेंडा गढ़ते रहते हैं।

पटनिया मीडिया के बंधु यह भूल जाते हैं कि कुशवाहा (कोईरी) मूलतः सब्जी उत्पादक व बागवानी करने वाला समूह है। गाजर, मूली, चुकंदर भी सब्जी में आते हैं और टामाटर, बैंगन, भिंडी, लौकी, नेनुआ भी सब्जी हैं, वहीं आलू व अरबी भी सब्जी हैं और गोभी, पालक, सेम आदि भी सब्जी हैं, लेकिन इनमें से कोई जड़ है, कोई तना, कोई फल, कोई धरती के नीचे होता है, कोई ऊपर, कोई लत में फलता है, कोई पौधे में, इसके साथ सबका न्यूट्रीशन वेल्यू अलग-अलग है। इसी तरह हर नेता की अपनी यात्रा, संघर्ष और राजनीतिक वेल्यू है। खाली जाति ही सबकुछ नहीं होता। अगर जाति से सबकुछ होता तो उपेंद्र जी या सम्राट जी के जगह पर कोई भी फलाना जी और ढिमकाना जी हो सकते थे। ऐसा हुआ नहीं न?

सम्राट जी के मुख्यमंत्री बनने से हम ही नहीं, बल्कि बिहार की युवा आबादी बहुत खुश है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हमारी नजर में बाकी नेताओं का महत्व कम हो गया। सम्राट जी की मेहनत और राजनीतिक कौशल ने उनको सीएम की कुर्सी तक पहुंचाया है। हां, उपेंद्र जी की पार्टी के एकाध विधायकों की इच्छा जरूर है कि वे किसी तरह भाजपा के विधायक बन जाएं, ताकि भविष्य में उनके लिए सांसद बनने की राह खुल जाये। एक विधायक, जिनकी राजनीतिक पहचान ही उपेंद्र जी की देन है, वह पत्रकारों को ऑफ द रिकार्ड यह खबर दे रहे हैं कि भाजपा में उनके दल के विलय पर बात हो रही है। यह अलग बात है कि रालोमो में हैं तो उनकी एक वेल्यू है, भाजपा के समुंदर में कहां विलीन हो जायेंगे, पता भी नहीं चलेगा। खैर, इस समय धर्म और जाति की राजनीति को जितनी बेहतर तरीके से पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समझ रहे हैं, दूसरा कोई नेता/पत्रकार उसे डिकोड कर पाने की स्थिति में नहीं है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।