बोकारो ट्रेजरी घोटाला: एसपी ऑफिस के सिपाही के घर छापा, 8.75 लाख कैश बरामद, SIT की तीसरी गिरफ्तारी

बोकारो ट्रेजरी घोटाले में CID की बड़ी कार्रवाई, SP कार्यालय के सिपाही काजल मंडल गिरफ्तार, 8.75 लाख नकद बरामद, SIT की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं।

Razi Ahmad
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Bokaro Treasury Scam : झारखंड के चर्चित ट्रेजरी घोटाले में जांच एजेंसी की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की एसआईटी ने बोकारो एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में तैनात सिपाही काजल मंडल को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उसके घर पर छापेमारी में 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। आरोपी को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया गया है।

जांच में सामने आया है कि काजल मंडल, पहले से गिरफ्तार लेखापाल कौशल पांडेय का करीबी सहयोगी है। एसआईटी के अनुसार, सरकारी यात्रा मद की राशि को अवैध तरीके से निकालकर काजल मंडल के खाते में ट्रांसफर किया जाता था, जिसके बाद वह रकम नकद निकालकर अपने घर में रखता था।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

इस मामले में इससे पहले एसआईटी ने कौशल पांडेय के सहयोगी गृह रक्षक सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह और एएसआई अशोक कुमार भंडारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। काजल मंडल की गिरफ्तारी इस केस में तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी 4 मई को कौशल पांडेय और उसके दो सहयोगियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि एसपी कार्यालय के लेखा शाखा से जुड़े कर्मियों ने फर्जी और अस्थायी खातों के जरिए सरकारी राशि की निकासी की।

करोड़ों की संपत्ति और नकदी बरामद

जांच के दौरान बोकारो के तेलीडीह क्षेत्र में जमीन और मकान के दस्तावेज भी मिले हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंकों में करीब 1.93 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज किया गया है। साथ ही 8.75 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं।

अन्य जिलों तक पहुंचेगी जांच

एसआईटी अब इस मामले की जांच को और आगे बढ़ाते हुए हजारीबाग और चाईबासा के कार्यालयों में भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। CID ने हजारीबाग, बोकारो और चाईबासा जिलों के मामलों को टेकओवर कर जांच शुरू कर दी है।

ट्रेजरी नियमों पर भी सवाल

ट्रेजरी कोड के नियमों के अनुसार, डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) की जिम्मेदारी होती है कि वे सरकारी खर्चों की जांच और सत्यापन पूरी सतर्कता के साथ करें। बिल और वाउचर की वैधता, खर्च की आवश्यकता और लेखा प्रक्रिया की निगरानी उनकी जवाबदेही में शामिल है। इस घोटाले के बाद इन नियमों के पालन पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।