
रांची : झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के आजीवन सदस्य संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व भर में मानवता,सेवा और करुणा के आदर्श को समर्पित विश्व रेडक्रॉस दिवस प्रत्येक वर्ष 8 मई को मनाया जाता है।विश्व रेड क्रॉस दिवस मनाने की शुरुआत 1948 में की गई थी ताकि रेडक्रॉस के संस्थापक हेनरी डुनेट की स्मृति में हर वर्ष उनके जन्म दिवस 8 मई को इस दिन को समर्पित किया जा सके। उन्होंने युद्ध और आपदा के समय घायल एवं पीड़ित लोगों की सहायता के लिए पहल किया था।विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को मानव सेवा, आपदा राहत और स्वास्थ्य सहायता के प्रति जागरूक करना है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि जाति, धर्म, भाषा और सीमाओं से परे जाकर जरूरतमंदों की सहायता करना ही सच्ची मानवता है।
रेडक्रॉस संगठन युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, महामारी और अन्य संकटों में निष्पक्ष होकर सहायता प्रदान करता है।इस दिवस की महत्ता अत्यंत व्यापक है। रेडक्रॉस ने विश्वभर में लाखों लोगों की जान बचाई है और संकट के समय उन्हें राहत पहुंचाई है। चाहे भूकंप हो,बाढ़, युद्ध या महामारी-हर स्थिति में यह संगठन अग्रणी भूमिका निभाता है। यह दिवस समाज में सेवा, सहानुभूति और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। साथ ही युवाओं को समाजसेवा के लिए प्रेरित करता है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।स्कूलों,कॉलेजों एवं सामाजिक संस्थाओं में मानवता और सेवा के मूल्यों परआधारित कार्यक्रम होते हैं।
रेडक्रॉस स्वयंसेवकों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने निःस्वार्थ सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है।आपदा प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।इस दिवस के प्रमुख उद्देश्य हैं जरूरतमंदों की सहायता के लिए लोगों को प्रेरित करना।आपदा के समय त्वरित और प्रभावी राहत कार्य सुनिश्चित करना।स्वास्थ्य सेवाओं और प्राथमिकचिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाना।मानवाधिकार और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना।विश्व रेडक्रॉस दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी का स्मरण है। यह दिवस हमें सिखाता है कि हर व्यक्ति अपने स्तर पर समाज की सेवा कर सकता है। आज के समय में, जब विश्व विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में रेडक्रॉस जैसी संस्थाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें भी उनके सिद्धांतों को अपनाकर एक बेहतर और संवेदनशील समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

