
रांची : शाश्वत इंस्टीच्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन, हुटूप, रांची में प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए “सफलता के मंत्र” विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पांडेय शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है ज्ञान की प्राप्ति, और ज्ञान के लिए श्रद्धा, तत्परता तथा इंद्रिय निग्रह बेहद आवश्यक हैं। अपने संबोधन में डॉ. पांडेय ने मन के महत्व को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि “मन” के पहले “न” लगाने से “नमन” और बाद में “न” लगाने से “मनन” शब्द बनता है। यानी नमन और मनन ही ज्ञान और सफलता की असली कुंजी हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा-
“सुखी उम्मीदों की कोई डाली नहीं होती,
बंद किस्मत की कोई ताली नहीं होती।
झुक जाए जो माँ-बाप के चरणों में,
उसकी झोली कभी खाली नहीं होती।”
डॉ. पांडेय ने कहा कि इंसान अपने दो हाथों से करोड़ों लोगों को नहीं मार सकता, लेकिन इन्हीं दो हाथों को जोड़कर करोड़ों दिल जरूर जीत सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “एक प्रणाम हजार परिणाम बदल सकता है।” महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भीष्म पितामह लगातार दस दिनों तक पांडव सेना का संहार कर रहे थे। तब श्रीकृष्ण की सलाह पर द्रौपदी ने भीष्म पितामह के शिविर में जाकर उनके चरण स्पर्श किए। भीष्म ने उन्हें “अखंड सौभाग्यवती भव” का आशीर्वाद दिया। जब द्रौपदी ने पूछा कि पांडवों का विनाश करते हुए उनका अखंड सौभाग्य कैसे बना रहेगा, तब भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु का रहस्य स्वयं बता दिया। डॉ. पांडेय ने कहा कि यह द्रौपदी के एक प्रणाम का प्रभाव था।

उन्होंने भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा-
“प्रात काल उठि कै रघुनाथा।
मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥”
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे जीवन में सफलता चाहते हैं, तो नमन और मनन को अपने व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शाश्वत बीएड कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. एस. के. सिन्हा ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में सफलता के लिए अच्छे आचार, विचार और संस्कार बेहद जरूरी हैं। उन्होंने संस्कृत का यह श्लोक सुनाया-
“अभिवादन शीलस्य, नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥”
उन्होंने कहा कि नमन और वंदन से व्यक्ति को आयु, विद्या, बल और यश—चारों की प्राप्ति होती है। यह प्रेरणादायक संगोष्ठी शाश्वत संस्थान के आधार स्तंभ डॉ. अनिल कुमार शर्मा, अनुपम शंशाक, ए. के. भगत और स्नेह रंजन के सौजन्य से आयोजित की गई। कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं में डॉ. बजरंगी मंडल, डॉ. राखी कुमारी, डॉ. परमिंदर कौर, डॉ. अमृता रॉबर्ट, डॉ. सरिता कुमारी, डॉ. विनिता कुमारी, डॉ. फैजल आलम, सुश्री नम्रता कुमारी, सुश्री रिया कुमारी, सुश्री प्रियंका राज मुंडा और उमेश कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ देखने को मिली और पूरा हॉल खचाखच भरा रहा।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. जे. बी. पांडेय ने प्राचार्य और शिक्षकों को सुंदरकांड की प्रति भेंट कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि का स्वागत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एस. के. सिन्हा ने शॉल और स्मृति चिह्न देकर किया। संगोष्ठी का संचालन अंग्रेजी शिक्षिका डॉ. परमिंदर कौर ने किया। स्वागत गान छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत किया, जबकि फोटोग्राफी की जिम्मेदारी उमेश कुमार महतो ने निभाई। धन्यवाद ज्ञापन हिंदी शिक्षक डॉ. बजरंगी मंडल ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और शांति पाठ के साथ हुआ।

