
Gurindervir Singh : जब गुरिंदरवीर सिंह ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया, तो पूरे देश ने भारत के सबसे तेज धावक का स्वागत किया। लेकिन इस ऐतिहासिक दौड़ के पीछे सालों का संघर्ष, पिता का त्याग और उनका अटूट विश्वास छिपा है।
पंजाब पुलिस के रिटायर्ड असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर और पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी कमलजीत सिंह के लिए शनिवार का दिन किसी सपने के सच होने जैसा था। फोन पर लगातार आ रही बधाइयों के बीच भावुक पिता ने याद किया कि कैसे उन्होंने बचपन में ही अपने बेटे की रफ्तार को पहचान लिया था।
जब कोच ने कहा- देश का नाम रोशन करेगा यह लड़का
गुरिंदरवीर जब छठी कक्षा में थे, तब उनके पहले कोच सरवन सिंह ने कमलजीत से कहा था कि यह लड़का एक दिन इंडिया का टॉप प्लेयर बनेगा। पिता ने तभी तय कर लिया था कि बेटे के खेल के लिए वह अपनी हैसियत से बढ़कर भी खर्च करने को तैयार थे।
गुरिंदरवीर को ट्रेनिंग के लिए रोजाना बसों में लंबा सफर तय करना पड़ता था, जिससे वह पूरी तरह थक जाता था। बेटे की इस थकान को दूर करने और समय को बचाने के लिए पिता ने तंगी के बावजूद 5,000 रुपये में एक पुराना स्कूटर खरीदा। बाद में जब उस स्कूटर के किक-स्टार्ट में दिक्कत आने लगी, तो कमलजीत ने अपनी वित्तीय सीमाओं से बाहर जाकर किस्तों पर नया स्कूटर लिया ताकि बेटे की ट्रेनिंग में एक दिन का भी खलल न पड़े।
बेटे के सपनों को उड़ान देने के लिए इस परिवार ने भोगपुर के पास अपना गांव छोड़ दिया और जालंधर शिफ्ट हो गया। कमलजीत ने हर हाल में यह सुनिश्चित किया कि गुरिंदरवीर को ट्रेनिंग और रहने-सहने में कोई असुविधा न हो।
पिता ने बताया कि आज बेटे ने उनके सारे त्याग सफल कर दिए हैं। उन्होंने जालंधर आर्ट्स एंड स्पोर्ट्स कॉलेज के कोच सरबजीत सिंह हैप्पी के योगदान की भी सराहना की, जिन्होंने गुरिंदरवीर को इस मुकाम तक पहुंचाया।
ओलंपिक मेडल का सपना, लेकिन सरकार से अब भी नौकरी का इंतजार
नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद अब पिता की आंखों में एक ही सपना है। बेटे को देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतते देखना। हालांकि, इस ऐतिहासिक कामयाबी के बीच पिता के दिल में एक मलाल भी है।
कमलजीत सिंह ने बताया कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद भी पंजाब सरकार की ओर से गुरिंदरवीर को अब तक कोई नौकरी नहीं दी गई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि देश का मान बढ़ाने वाले इस खिलाड़ी को जल्द रोजगार दिया जाए।

