
भारत में हर साल 27 मई को ‘नेशनल सनस्क्रीन डे’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को सनस्क्रीन के महत्व के प्रति जागरूक करना और सूरज की हानिकारक UVA और UVB किरणों से त्वचा को बचाने के लिए प्रेरित करना है। गर्मियों में तेज धूप त्वचा को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है, इसलिए सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल बेहद जरूरी माना जाता है।
सनस्क्रीन क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, सनस्क्रीन त्वचा को सूरज से होने वाले नुकसान, पिगमेंटेशन और समय से पहले बूढ़ा होने यानी फोटोएजिंग से बचाने में मदद करती है। मई महीने को दुनिया भर में ‘मेलानोमा जागरूकता माह’ के रूप में भी मनाया जाता है। कई स्टडी में यह साबित हुआ है कि रोजाना सनस्क्रीन लगाने से त्वचा कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सही सनस्क्रीन कैसे चुनें?
आज बाजार में कई तरह की सनस्क्रीन उपलब्ध हैं, जैसे केमिकल और मिनरल सनस्क्रीन। इसके अलावा अलग-अलग स्किन टाइप के अनुसार भी सनस्क्रीन बनाई जाती हैं। इसलिए अपनी त्वचा के प्रकार और जरूरत के अनुसार सही SPF वाली सनस्क्रीन चुनना जरूरी है। ऑयली, ड्राई या सेंसिटिव स्किन के लिए अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं।
घर के अंदर भी लगाएं सनस्क्रीन
अक्सर लोग मानते हैं कि घर के अंदर रहने पर सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होती, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि UV किरणें खिड़कियों से भी अंदर आ सकती हैं। इससे त्वचा को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचता है। इसलिए दिन के समय घर में रहने पर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।
सनस्क्रीन लगाने की आदत कैसे बनाएं?
रोजाना सनस्क्रीन लगाने के लिए फोन में रिमाइंडर सेट करें और इसे अपनी रोजमर्रा की जरूरी चीजों के पास रखें। बाहर जाते समय ट्रैवल-साइज़ सनस्क्रीन साथ रखना भी फायदेमंद होता है।

