नेतरहाट-पलामू टाइगर रिजर्व में ईको सेंसिटिव जोन के नियमों की उड़ी धज्जियां, एनजीटी ने लिया संज्ञान

Archana Ekka
4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

. 59 होटल-रिसॉर्ट के अवैध निर्माण पर सख्ती, मुख्य सचिव समेत 6 अफसरों को नोटिस

. बिना मास्टर प्लान कैसे बन गए रिसॉर्ट? 8 जुलाई को NGT में जवाब दाखिल करने का आदेश

महुआडांड़ : झारखंड के सबसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में शुमार नेतरहाट और पलामू टाइगर रिजर्व में इको सेंसिटिव जोन के नियमों को दरकिनार कर हो रहे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निर्माण पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है। कोलकाता स्थित एनजीटी की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने पर्यावरण कार्यकर्ता गोविंद पाठक की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड के मुख्य सचिव समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को होगी।

क्या है मामला?

याचिका में आरोप है कि पलामू टाइगर रिजर्व, बेतला नेशनल पार्क, नेतरहाट और महुआडांड़ वुल्फ सेंचुरी के ईएसजेड क्षेत्र में पर्यावरणीय मंजूरी और जोनल मास्टर प्लान के बिना 59 होटल और रिसॉर्ट का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से दो निर्माण तो सीधे पलामू वन्यजीव अभयारण्य की अधिसूचित सीमा के भीतर हो रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ईएसजेड अधिसूचना, 2011 के तहत किसी भी संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण से पहले जोनल मास्टर प्लान, टूरिज्म मास्टर प्लान और मॉनिटरिंग कमेटी का गठन अनिवार्य है। झारखंड में आज तक ये तीनों तैयार नहीं किए गए, फिर भी निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। इससे बाघ, हाथी और भेड़ियों के प्राकृतिक कॉरिडोर को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

25 मई को हुई सुनवाई

न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने मामले को ‘गंभीर पर्यावरणीय चिंता’ का विषय मानते हुए सुनवाई की। पीठ ने कहा कि मास्टर प्लान के अभाव में ईएसजेड में कोई भी नया व्यावसायिक निर्माण अवैध है। एनजीटी ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी, झारखंड के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।

याचिकाकर्ता की 3 बड़ी मांगें

1. ईएसजेड में चल रहे सभी अवैध निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
2. नियमों के विरुद्ध बने होटल-रिसॉर्ट को ध्वस्त किया जाए।
3. लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाए।

क्यों अहम है पीटीआर-नेतरहाट?

पलामू टाइगर रिजर्व 1974 में देश के पहले 9 टाइगर रिजर्व में शामिल हुआ था। नेतरहाट को ‘छोटानागपुर की रानी’ कहा जाता है। महुआडांड़ देश की एकमात्र वुल्फ सेंचुरी है। यह पूरा इलाका हाथी, बाघ, तेंदुआ और सैकड़ों वन्यजीव प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। विशेषज्ञों के मुताबिक अनियंत्रित निर्माण से वन्यजीवों का आवागमन बाधित हो रहा है और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं 40% तक बढ़ी हैं।

क्या होगा असर?

अगर एनजीटी ने निर्माण को अवैध माना तो 59 होटल-रिसॉर्ट पर बुलडोजर चल सकता है। साथ ही निर्माण की अनुमति देने वाले अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एनजीटी के रुख का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला झारखंड के जंगलों को बचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

क्या है इको सेंसिटिव जोन

राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के 10 किमी के दायरे को ईएसजेड घोषित किया जाता है। यहां खनन, रेड कैटेगरी उद्योग और बड़े व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित हैं। होटल-रिसॉर्ट के लिए जोनल मास्टर प्लान और MoEF&CC की मंजूरी जरूरी होती है। मकसद वन्यजीवों के कॉरिडोर को सुरक्षित रखना है।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।