‘मन की बात’ में गूंजा बिहार, PM मोदी ने सत्तू और जर्दालु आम का किया जिक्र, सीएम सम्राट चौधरी ने जताया आभार

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के सत्तू और जर्दालु आम का जिक्र किया। सीएम सम्राट चौधरी ने आभार जताते हुए इसे बिहार के लिए गर्व का क्षण बताया।

Razi Ahmad
2 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में बिहार के पारंपरिक सत्तू और प्रसिद्ध जर्दालु आम का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के इस जिक्र के बाद बिहार में खुशी का माहौल देखा गया है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह देते हुए सत्तू को एक पौष्टिक और ऊर्जा देने वाला पेय बताया। उन्होंने कहा कि यह न केवल पेट भरता है बल्कि शरीर को ताकत भी देता है, जिससे यह गर्मियों में बेहद उपयोगी साबित होता है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में मिलने वाली आम की किस्मों का भी उल्लेख किया और बिहार के जर्दालु आम की विशेषता बताते हुए कहा कि इसकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है। उन्होंने दशहरी, लंगड़ा, चौसा, अल्फांसो और केसर जैसे अन्य प्रसिद्ध आमों का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री के इस उल्लेख पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के स्थानीय उत्पादों और परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान मिलती है, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के उल्लेख से बिहार के किसानों, उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों को प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य के उत्पादों की मांग देश-विदेश में बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत के स्थानीय उत्पाद अब केवल गांवों और शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक बाजारों तक अपनी पहचान बना रहे हैं।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।