
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया है। कांग्रेस ने जैसे ही प्रणव झा को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया, वैसे ही सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर असहमति खुलकर सामने आने लगी। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कांग्रेस के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। गठबंधन में बढ़ते तनाव को देखते हुए कांग्रेस अब डैमेज कंट्रोल मोड में नजर आ रही है। जानकारी के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के ऑब्जर्वर बनाए गए भूपेश बघेल शनिवार को रांची पहुंचेंगे। इस दौरान वे पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व गठबंधन में पैदा हुए गतिरोध को दूर करने और सहयोगी दलों के बीच बनी नाराजगी खत्म करने की कोशिश करेगा।
कांग्रेस पर मनमानी का आरोप
शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन को लेकर कांग्रेस अपनी राय या आग्रह रख सकती थी, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार झामुमो का था। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि उम्मीदवार घोषित करने से पहले गठबंधन सहयोगियों के बीच पर्याप्त चर्चा और सहमति बननी चाहिए थी। उनके मुताबिक, कांग्रेस के इस कदम से झामुमो के कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं और संगठन के भीतर नाराजगी बढ़ी है।
‘हमने हमेशा गठबंधन धर्म निभाया’
झामुमो महासचिव ने कहा कि उनकी पार्टी ने हर मौके पर गठबंधन धर्म का पालन किया है। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को नौ सीटें देकर पूरा सहयोग दिया गया था। लेकिन जब बिहार विधानसभा चुनाव की बात आई तो कांग्रेस ने झामुमो को सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में झामुमो को पांच सीटें तक नहीं दी गईं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पहले से ही असंतोष था। अब राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर लिया गया फैसला उस नाराजगी को और बढ़ाने का काम कर रहा है।
कार्यकर्ताओं में बढ़ रहा असंतोष
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि किसी भी गठबंधन की मजबूती संवाद और आपसी समन्वय पर निर्भर करती है। लेकिन राज्यसभा उम्मीदवार के मामले में जिस तरह से निर्णय लिया गया, उससे झामुमो के कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगी। संगठन की भावना और नेतृत्व के निर्देशों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
महागठबंधन के रिश्तों पर उठे सवाल
राज्यसभा चुनाव को लेकर पैदा हुई यह तल्खी अब झारखंड की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस विवाद का असर महागठबंधन की एकजुटता पर पड़ेगा। फिलहाल सभी की नजरें झामुमो के अगले कदम और कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।

