
Jharkhand Liquor Scam : झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को अदालत से राहत नहीं मिली है। एसीबी की विशेष अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए सिम कार्ड को रिलीज करने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी है।
राजेंद्र प्रसाद जायसवाल छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी हैं और मेसर्स वेलकम डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं संचालक बताए जाते हैं। उन पर झारखंड में देशी शराब आपूर्ति से जुड़े कथित घोटाले में संलिप्त होने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, राजेंद्र जायसवाल ने निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के करीबी माने जाने वाले सिद्धार्थ सिंघानिया के माध्यम से राज्य में देशी शराब की आपूर्ति का ठेका हासिल किया था। आरोप है कि ठेका प्राप्त करने के बदले उत्पाद विभाग के कुछ अधिकारियों को भारी कमीशन दिया गया था।
एसीबी का दावा है कि आपूर्ति की गई देशी शराब की गुणवत्ता खराब थी, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया गया। इसी मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने नवंबर 2025 में राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से जब्त सिम कार्ड को वापस करने की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने जांच की आवश्यकता को देखते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। विशेष अदालत के इस फैसले को मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल शराब घोटाला मामले की जांच जारी है और एसीबी विभिन्न पहलुओं पर साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। अदालत के इस आदेश के बाद आरोपी पक्ष को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।

