
Jharkhand High Court : सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक कर्मचारी को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के फैसले में संशोधन करते हुए मुआवजे की राशि 1.55 लाख रुपये से बढ़ाकर 11.15 लाख रुपये कर दी। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका दाखिल होने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राज कुमार चौधरी से जुड़ा है, जो एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्होंने मुआवजे के लिए एमएसीटी, रांची में दावा दायर किया था। ट्रिब्यूनल ने उन्हें केवल 1.55 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। इस फैसले से असंतुष्ट होकर उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में अपील की।
याचिकाकर्ता का कहना था कि दुर्घटना के बाद उनकी शारीरिक क्षमता प्रभावित हुई, जिससे नौकरी करने की क्षमता और भविष्य की आय पर भी असर पड़ा। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इन पहलुओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि मुआवजा तय करते समय केवल मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज शारीरिक विकलांगता नहीं, बल्कि दुर्घटना का व्यक्ति की कमाई, करियर और भविष्य की संभावनाओं पर पड़ने वाला प्रभाव भी देखा जाना चाहिए।
रिकॉर्ड के अनुसार, हादसे के समय राज कुमार की मासिक आय 10 हजार रुपये थी, जो बाद में बढ़कर 15 हजार रुपये हो गई। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वेतन बढ़ जाने से यह नहीं माना जा सकता कि उन्हें आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। यदि दुर्घटना नहीं होती, तो उन्हें पदोन्नति मिलने की संभावना थी और उनकी मासिक आय करीब 25 हजार रुपये तक पहुंच सकती थी।
कार्य क्षमता पर भी माना असर
अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट में 45 प्रतिशत शारीरिक विकलांगता का उल्लेख होने के बावजूद नौकरी पर उसके प्रभाव को देखते हुए 25 प्रतिशत कार्यात्मक अक्षमता मानते हुए भविष्य की आय में होने वाले नुकसान का आकलन किया।
किन मदों में बढ़ाया गया मुआवजा?
हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने कई जरूरी मदों पर पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया था। इसके बाद अदालत ने
> भविष्य की आय में कमी के लिए 5.85 लाख रुपये
> फिजियोथेरेपी और इलाज के लिए 60 हजार रुपये
> भविष्य के इलाज के लिए 50 हजार रुपये
> परिचारक, विशेष आहार और अन्य देखभाल के लिए 90 हजार रुपये
> दर्द, मानसिक पीड़ा और जीवन की गुणवत्ता पर पड़े असर के लिए भी मुआवजे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की।
बीमा कंपनी को छह सप्ताह का समय
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी छह सप्ताह के भीतर 11.15 लाख रुपये की पूरी मुआवजा राशि जमा करे। साथ ही दावा याचिका दायर होने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा किया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पूरी राशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में भेजी जाए।

