2019 के चर्चित सांप्रदायिक सौहार्द मामले में सभी आरोपी बरी, अदालत ने साक्ष्यों को माना अपर्याप्त

सिकिदिरी के 2019 के चर्चित मामले में अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य और प्रत्यक्ष गवाहों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को अपर्याप्त माना।

Razi Ahmad
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Ranchi District Court : सिकिदिरी थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में दर्ज सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के चर्चित मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। पर्याप्त साक्ष्य और प्रत्यक्ष गवाहों के अभाव में न्यायालय ने मामले में ट्रायल का सामना कर रहे पांचों आरोपियों को बरी कर दिया।

न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने आरोपी बुधदेव महतो, मुकेश कुमार महतो उर्फ सुकेश, यशवंत कुमार, ओम प्रकाश महतो और मुकेश कुमार यादव को संदेह का लाभ देते हुए आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका।

यह मामला 5 जून 2019 का है। शिकायतकर्ता मोहम्मद इम्तियाज अंसारी ने आरोप लगाया था कि ईद की नमाज के बाद सिकिदिरी घाटी के झरना पानी क्षेत्र में उनके और मुख्तार अंसारी के साथ मारपीट की गई थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि दोनों को रोककर उनके कपड़े उतरवाए गए और एक धार्मिक स्थल के सामने विशेष नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया। घटना के बाद मामला काफी चर्चा में रहा था और पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से केवल एक गवाह मुन्तजिर अहमद रजा को प्रस्तुत किया गया। गवाह ने अदालत को बताया कि उसने घटना से संबंधित एक वीडियो व्हाट्सएप के माध्यम से देखा था। हालांकि वह वीडियो में मौजूद किसी भी आरोपी की पहचान नहीं कर सका। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि कथित पीड़ितों और मूल शिकायतकर्ता की गवाही अदालत में दर्ज नहीं कराई जा सकी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत वीडियो को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप प्रमाणित नहीं किया गया और उपलब्ध साक्ष्य आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में आपराधिक न्याय प्रणाली के सिद्धांतों के तहत आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाना आवश्यक है।

फैसले के साथ ही करीब सात वर्ष पुराने इस मामले का न्यायिक पटाक्षेप हो गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के लिए ठोस, विश्वसनीय और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों का होना आवश्यक है, जिसकी कमी इस मामले में पाई गई।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।