
नई दिल्ली : फ्रांस की राजधानी पेरिस में 25 जून को होने वाली चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर की नीलामी को रोकने के लिए यूटी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने इन बेशकीमती वस्तुओं की बरामदगी और भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (एमईए) से तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। इस संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन के संस्कृति सचिव की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (यूएनईएस) को एक आधिकारिक पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है।
पंजाब यूनिवर्सिटी और पीजीआई के मार्के से खुली पोल
संस्कृति सचिव ने पत्र में नीलामी के लिए रखी गई दो फर्नीचर वस्तुओं की उत्पत्ति (प्रोवेनेंस) को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन वस्तुओं पर क्रमशः “PU Chem/55” और “PGI/W/CH-020” अंकित है, जो इनके पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के रसायन शास्त्र विभाग और पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से संबंधित होने का सीधा संकेत देते हैं। इन निशानों से यह साफ आशंका पैदा हो गई है कि इस ऐतिहासिक फर्नीचर को उसके वैध संरक्षकों की अनुमति के बिना चोरी-छिपे विदेश भेजा गया है।
यह फर्नीचर चंडीगढ़ की विशिष्ट आधुनिक स्थापत्य विरासत और महान वास्तुकार ले कोर्बुजिए व उनके सहयोगियों की मूल परिकल्पना का अभिन्न हिस्सा है।
कैपिटल कॉम्प्लेक्स के यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के कारण इस मूल फर्नीचर का संरक्षण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण है। विदेशी नीलामी बाजार में इस तरह धरोहरों के सामने आने से इनके अवैध निर्यात और सांस्कृतिक संपत्तियों की तस्करी की गंभीर आशंकाओं को बल मिला है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने 23 जून को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर ली हैं। पुलिस इस कथित चोरी, अवैध बिक्री और तस्करी के नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है।
प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से इस नीलामी को तुरंत स्थगित या निरस्त कराने के लिए फ्रांसीसी अधिकारियों के समक्ष मामला उठाए। प्रशासन ने इस कानूनी लड़ाई और जांच को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज, तकनीकी सहायता और प्रासंगिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।

