
गढ़वा: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में शनिवार को गढ़वा परिषदन में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश सचिव सह प्रदेश प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह, प्रदेश प्रवक्ता मृदुल राज, गढ़वा जिलाध्यक्ष ओबैदुल्लाह हक अंसारी, सुरेंद्रनाथ तिवारी और सुधीर कुमार चंद्रवंशी ने मीडिया को संबोधित किया।
परीक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी को लेकर सरकार पर निशाना
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने देश की परीक्षा व्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देशभर में करीब 89 पेपर लीक के मामले सामने आए, जिनकी वजह से 48 परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ीं। प्रदेश प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने कहा कि एक अन्य अध्ययन के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 15 राज्यों में 41 पेपर लीक की घटनाएं हुईं। इन घटनाओं से करीब 1.4 करोड़ अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ, जो महज एक लाख से कुछ अधिक सरकारी पदों के लिए प्रतियोगिता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में पेपर लीक के मामलों में 3 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद राजस्थान सहित कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं, जिससे साफ है कि केवल कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं हुआ।
चार बड़ी परीक्षाओं में एक करोड़ से ज्यादा छात्र हुए प्रभावित
प्रदेश प्रवक्ता मृदुल राज ने कहा कि केवल चार बड़ी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि नीट यूजी 2026 में लगभग 24 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ और मामला सीबीआई जांच से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2024 की परीक्षा सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने के बाद रद्द करनी पड़ी, जिससे 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। सीटेट 2021 पेपर लीक के कारण 28 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ा, जबकि यूजीसी नेट 2024 परीक्षा भी आयोजन के अगले ही दिन रद्द करनी पड़ी, जिससे 11 लाख छात्र प्रभावित हुए और दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी।
सरकारी विभागों में लाखों पद अब भी खाली
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि केंद्र सरकार के अपने आधिकारिक आंकड़े ही रोजगार की स्थिति को बयां करते हैं। उनके अनुसार, 1 मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9,64,359 पद खाली थे। वहीं, 1 जुलाई 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में 84,106 पद रिक्त थे। रेलवे भर्ती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच 4.11 लाख भर्तियां हुईं, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह संख्या बढ़कर केवल 5.02 लाख तक पहुंची। दूसरी ओर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले युवाओं की संख्या करोड़ों में पहुंच चुकी है।
उच्च शिक्षित युवा भी बेरोजगारी की मार झेल रहे
वक्ताओं ने कहा कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर सामान्य स्थिति में 10.2 प्रतिशत और साप्ताहिक आधार पर 13.8 प्रतिशत है। वहीं माध्यमिक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र शोध बताते हैं कि आज सबसे अधिक बेरोजगार उच्च शिक्षित स्नातक और स्नातकोत्तर युवा हैं।
छात्र आत्महत्याओं पर भी जताई चिंता
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की विफलता की सबसे बड़ी कीमत छात्र अपनी जान देकर चुका रहे हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2022 में देश में हुई कुल आत्महत्याओं में 7.6 प्रतिशत यानी करीब 13 हजार मामले छात्रों के थे। सितंबर 2025 में जारी वर्ष 2023 की रिपोर्ट में यह संख्या अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि कोटा, त्रिशूर और चेन्नई जैसे प्रमुख कोचिंग केंद्रों में छात्रों की आत्महत्याओं के कई मामले सामने आए हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा बजट में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष त्रिपुरारी सिंह, जिला महासचिव योगेंद्रनाथ चौबे, बृजेंद्र चौधरी, सुनील कालिया, अक्षय राम, क्यामुद्दीन अंसारी, नसीम अंसारी, जवाहर चौधरी, सचिन शर्मा समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

