
Raj Hospitals : झारखंड के 400 से अधिक निजी अस्पतालों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया’ (AHPI) ने अस्पतालों में बढ़ती हिंसा और उपद्रव की घटनाओं पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। ‘लापरवाही’ के आधारहीन आरोपों के नाम पर अस्पतालों को निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को AHPI ने एक खतरनाक चलन करार दिया है।
AHPI झारखंड के अध्यक्ष, डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि मरीजों की मृत्यु या स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में जिस तरह का हिंसक माहौल बनाया जा रहा है, वह पूरी तरह से अनुचित है। डॉ. कुमार ने कहा, “चिकित्सा विज्ञान में हर जीवन को बचाना डॉक्टरों का प्रयास होता है, लेकिन परिणाम की गारंटी देना संभव नहीं है। जब डॉक्टर दिन-रात मेहनत कर किसी मरीज की जान बचाते हैं, तो बदले में उन्हें भीड़ की हिंसा का सामना करना पड़ता है, जो बेहद निराशाजनक है।”
राज हॉस्पिटल्स में डॉक्टरों की टीम ने एक गंभीर सड़क दुर्घटना के शिकार मरीज को 40 दिनों तक संघर्ष कर मौत के मुंह से बाहर निकाला। एक सफल उपचार के बावजूद, कुछ बाहरी उपद्रवी तत्वों ने ‘लापरवाही’ का आरोप लगाकर अस्पताल में हिंसा फैलाई। यह न केवल डॉक्टरों का मनोबल गिराता है, बल्कि उन अन्य गंभीर मरीजों के इलाज में भी बाधा डालता है जो आईसीयू में भर्ती होते हैं।
AHPI की प्रमुख अपील:
मीडिया बंधुओं से अनुरोध है के कोई भी संवेदनशील समाचार प्रकाशित या चलाने से पहले सभी पक्षों का बयान ज़रूर लें जिससे सही बातें समाज में जाए
उपद्रवियों से सावधान: बाहरी तत्व अक्सर अपने स्वार्थ के लिए मरीज के परिजनों को उकसाते हैं, जिससे डॉक्टर और मरीज के बीच का विश्वास खत्म हो रहा है।
सरकार से मांग : AHPI राज्य सरकार से मांग करती है कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए कड़े कानून लागू किए जाएं, ताकि वे बिना किसी डर के अपना कर्तव्य निभा सकें।
अस्पताल उपचार के स्थान हैं, न कि लड़ाई के मैदान। AHPI जनमानस से अपील करती है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति परिपक्वता दिखाएं।

