अब भी मजबूती से खड़ा है टाटा कॉलेज खड़ा करनेवाले पीसी बिरुवा का ब्रिटिशकालीन पैतृक मकान

चाईबासा के बड़ा लगड़ा गांव का ऐतिहासिक घर, जहां पीसी बिरुवा का जन्म हुआ, आज भी मानकी परंपरा, ब्रिटिशकालीन विरासत और कोल्हान की पुरानी सियासी ताकत की कहानी सुनाता है।

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चाईबासा : ये कोई साधारण घर नहीं है, ये वो ऐतिहासिक धरोहर है जिसको पीसी बिरुवा का घर कहा जाता है। मंझारी प्रखंड के बड़ा लगड़ा गांव में स्थित इसी पक्के मकान में पूर्णचंद्र बिरुवा का जन्म हुआ था। उनका लालन-पालन भी यहीं हुआ था। उनकी पहली किलकारी भी यहीं गूंजी थी। ब्रिटिशकाल में यहीं से उनके दादा इलाकाई मानकी कुरसो बिरुवा की हुकूमत चलती थी। कहते हैं, वह मानकी घोड़े पर सवार होकर अपनी पीढ़ (मानकी का प्रशासनिक इलाका जिसमें सामान्यत: 5 से 10 गांव आते थे) की निगरानी करते थे। कहते हैं, कोल्हान के टॉप-5 ब्रिटिशकालीन ताकतवर मानकियों में इनकी भी गिनती होती थी। मानकी कुरसो बिरुवा प्रोविजनल सांसद पीसी बिरुवा के दादा थे। इस तरह पीसी बिरुवा को सियासत विरासत में मिली थी। राजा बनने का हुनर भी दादाजी से ही मिली थी।

कहते हैं, अंग्रेजी हुकूमत के उस दौर में स्थानीय राजा के रूप में यही मानकी लोग हुकूमत चलाते थे। तब पीसी बिरुवा का मानकी खानदान काफी समृद्ध और इलाके में प्रभावशाली था। यही कारण है कि उन्होंने गांव से निकलकर राजधानी पटना से ग्रेजुएशन किया था। आजादी के पहले पटना में पढ़ना तब दिवास्वप्न जैसा था। बहरहाल, भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था आने के बाद इन मानकियों का रसूख और शक्तियां कम हो गयीं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।