विक्रमशिला सेतु का बदलेगा पूरा चेहरा: मरम्मत नहीं, क्षतिग्रस्त हिस्सा हटाकर होगा स्थायी पुनर्निर्माण रातभर चली हाईटेक जांच

Archana Ekka
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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर : बिहार के ऐतिहासिक और जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। वर्षों से मरम्मत और अस्थायी व्यवस्था के सहारे चल रहे इस पुल का अब सिर्फ पैचवर्क नहीं, बल्कि स्थायी पुनर्स्थापन किया जाएगा। भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल ने बताया कि राज्य मंत्रिपरिषद ने इसके लिए ₹126.25 करोड़ (₹12,625.55 लाख) की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस योजना के तहत क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर नया सस्पेंडेड स्लैब बनाया जाएगा, पूरे पुल की व्यापक मरम्मत होगी और फिलहाल लगे बेली ब्रिज की जगह स्थायी संरचना विकसित की जाएगी।

इस फैसले के साथ ही पुल के भविष्य को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता लगभग खत्म होती दिखाई दे रही है।
स्थायी पुनर्स्थापन की दिशा में बीती रात 10 बजे से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पटना की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने सेतु की तकनीकी जांच शुरू की। आधुनिक उपकरणों की मदद से पुल के बाहरी और भीतरी हिस्सों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। यह जांच गुरुवार रात भी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर इसे एक दिन और बढ़ाया जा सकता है। जांच के दौरान सुरक्षा कारणों से रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक पुल पर सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रखा गया। पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा गया।

सूत्रों के अनुसार, इस बार केवल दरारों की मरम्मत या अस्थायी सुधार पर काम नहीं होगा। जिस हिस्से में बेली ब्रिज लगाया गया है, वहां स्थायी निर्माण किया जाएगा। क्षतिग्रस्त भाग को हटाकर नया सस्पेंडेड स्लैब तैयार किया जाएगा, जिससे पुल की मजबूती और आयु दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद विस्तृत कार्ययोजना लागू की जाएगी और उसी आधार पर निर्माण एजेंसी को आगे की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में भागलपुर और खगड़िया के पुल निर्माण निगम के अभियंताओं के बीच जिम्मेदारी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय करने से बचने की कोशिश हो रही है। हालांकि अंतिम तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद जवाबदेही और आगे की कार्रवाई स्पष्ट होने की उम्मीद है।
विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार मरम्मत, जाम और प्रतिबंधों के कारण लाखों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। अब स्थायी पुनर्स्थापन की मंजूरी मिलने के बाद स्थानीय लोगों, व्यापारियों और यात्रियों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।