सफलता चाहिए तो अपनाएं नमन और मनन का मंत्र, डॉ. जे.बी. पांडेय ने विद्यार्थियों को बताया कामयाबी का राज

आरा के मॉडल +2 विद्यालय में सफलता के मंत्र पर विशेष व्याख्यान हुआ। डॉ. जे.बी. पांडेय ने विद्यार्थियों को नमन, मनन, ज्ञान और अनुशासन का महत्व बताया।

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आरा : मॉडल +2 विद्यालय आरा में विद्यार्थियों के हित में ‘सफलता के मंत्र’ विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पांडेय ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए नमन, मनन, ज्ञान और अनुशासन का महत्व बताया।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. पांडेय ने कहा कि नीति के अनुसार संसार में सात ऐसी जगहें हैं, जहां निमंत्रण मिलने पर भी नहीं जाना चाहिए। यदि किसी कारण वहां चले जाएं तो वहां रुकना नहीं चाहिए और अगर रुक भी जाएं तो किसी से इसका जिक्र नहीं करना चाहिए। उन्होंने इन स्थानों में वेश्यालय, मदिरालय, जुआलय, हिंसालय, न्यायालय, चिकित्सालय और नरकालय का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत संसार में सात ऐसी जगहें हैं, जहां बिना बुलाए भी जाना चाहिए, वहां रुकना चाहिए और पूछे जाने पर बताना भी चाहिए। ये स्थान विद्यालय, पुस्तकालय, अनाथालय, शिक्षकालय, सत्संगालय, देवालय और स्वर्गालय हैं। डॉ. पांडेय ने कहा कि इन जगहों पर जाने से यश मिलता है।

उन्होंने विद्यार्थियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि देश का सौभाग्य या दुर्भाग्य यह है कि आज के विद्यार्थी जहां जाना चाहिए, वहां जाने से कतराते हैं और कोई न कोई बहाना बनाते हैं। वहीं, जहां नहीं जाना चाहिए, वहां बिना बुलाए पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वह इस प्रतिष्ठित विद्यालय में बिना निमंत्रण के आकर भी आनंद महसूस कर रहे हैं और सभी विद्यार्थियों का हार्दिक नमन, वंदन और अभिनंदन करते हैं।

डॉ. पांडेय ने गीता का संदर्भ देते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए ज्ञान की प्राप्ति सबसे महत्वपूर्ण है। ज्ञान हासिल करने के लिए श्रद्धा, तत्परता और इंद्रिय-निग्रह जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि मनुष्य की 10 इंद्रियां होती हैं। इनमें पांच कर्म इंद्रियांहाथ, पैर, मुंह, लिंग और गुदा तथा पांच ज्ञान इंद्रियांआंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा हैं। आंख से देखने, कान से सुनने, मुंह से खाने, जीभ से रस और त्वचा से स्पर्श का ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि आंख सुंदरतम दृश्य देखना चाहती है, कान मधुरतम सुनना चाहता है, जीभ मिष्ठान, नाक सुगंध और त्वचा शीतलता का स्पर्श चाहती है। शब्द, रूप, रस, गंध और स्पर्श इंद्रियों के विषय हैं।

डॉ. पांडेय ने कहा कि इंद्रियों के राजा मन को नियंत्रित करना जरूरी है। मन के पहले ‘न’ लगाने से ‘नमन’ और बाद में ‘न’ लगाने से ‘मनन’ शब्द बनता है। उन्होंने नमन और मनन को ज्ञान प्राप्ति तथा सफलता का मंत्र बताया। इस मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा

सुखी उम्मीदों की कोई डाली नहीं होती,

बंद किस्मत की कोई ताली नहीं होती।

झुक जाए जो मां-बाप के चरणों में,

उसकी झोली कभी खाली नहीं होती।

डॉ. पांडेय ने कहा कि दो हाथों से हम करोड़ों लोगों को नहीं मार सकते, लेकिन यही दो हाथ जोड़कर करोड़ों लोगों के दिल जीते जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक प्रणाम हजार परिणाम बदल सकता है।

महाभारत का उदाहरण देकर समझाया नमन का महत्व

नमन के महत्व को समझाने के लिए डॉ. पांडेय ने महाभारत का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि भीष्म पितामह ने 10 दिनों तक पांडवी सेना का भीषण संहार किया। इसके बाद श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में पांडव दल की आपात बैठक हुई।

निर्णय के अनुसार द्रौपदी श्रीकृष्ण के साथ भीष्म पितामह के शिविर में पहुंचीं और उनके चरण स्पर्श कर प्रणाम किया। भीष्म पितामह ने उन्हें आशीर्वाद दिया‘अखंड सौभाग्यवती भव।’ इस पर द्रौपदी ने पूछा कि उनका अखंड सौभाग्य कैसे रहेगा, जबकि भीष्म पितामह प्रतिदिन पांडवी सेना का भीषण संहार कर रहे हैं। डॉ. पांडेय के अनुसार, इसके बाद भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु का रहस्य बताया। उन्होंने कहा कि यह द्रौपदी के एक प्रणाम का परिणाम था।

उन्होंने भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए रामचरितमानस की पंक्तियां भी सुनाईं

प्रात काल उठि कै रघुनाथा।

मातु पिता गुरु नावहिं माथा।”

जो पढ़ेगा, वही आगे बढ़ेगा’

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में वाईबीएन विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जो पढ़ेगा, वही आगे बढ़ेगा। अध्ययन से दूर रहने वाले विद्यार्थी को सफलता नहीं मिलेगी। संगोष्ठी की अध्यक्षता विद्यालय के भौतिकी के विद्वान प्राचार्य डॉ. राज देव सिंह ने की। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए विद्यार्थियों में आचार, विचार और संस्कार का होना बेहद जरूरी है।

उन्होंने संस्कृत की पंक्ति

अभिवादन शीलस्य, नित्यं वृद्धोपसेविन:।

चत्वारि तस्य वर्धंते आयुर्विद्या यशो बलम्।”

का उल्लेख करते हुए कहा कि नमन और वंदन से एक साथ आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होती है।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सक्रिय भागीदारी

 कार्यक्रम में विद्यालय के लगभग सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं की सक्रिय भागीदारी रही। इनमें डॉ. राजीव रंजन, डॉ. अजीत सिंह, पुष्पेंद्र मिश्र, ए.के. शर्मा, रवींद्र सिंहा, ओम प्रकाश कुमार, हैदर आलम, हसीकुर्रहमान, रीना शुक्ला, प्रियंका रानी, प्रियंका कुमारी, सोनी गुप्ता, अंजली गुप्ता और अंजु कुमारी शामिल रहे। संगोष्ठी में शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ छात्र-छात्राओं की सक्रियता कार्यक्रम के अंत तक बनी रही। मानवाधिकार टूडे पटना की ओर से ‘सर्वोत्तम शिक्षिका’ का सम्मान मिलने पर डॉ. ममता मिश्रा को सम्मानित किया गया।

वहीं, सुंदर कार्यक्रम के आयोजन के लिए डॉ. जे.बी. पांडेय ने प्राचार्य राजदेव सिंह को और प्रश्न का उत्तर देने के लिए हिंदी शिक्षिका सोनी गुप्ता को सुंदरकांड की प्रति देकर सम्मानित किया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी शिक्षकों का आभार जताया।

आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डॉ. ममता मिश्रा ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. राजीव रंजन तिवारी ने किया। छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पुष्पेंद्र मिश्र ने किया। अंत में राष्ट्रगान और शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।