
रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा सरकार की निवेश नीतियों पर लगाए गए आरोपों को तथ्यों से परे और राजनीतिक हताशा का परिणाम करार दिया है। जेएमएम महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने सोमवार को कहा कि भाजपा नेताओं में औद्योगिक निवेश प्रक्रिया की मौलिक समझ का अभाव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) और एमओयू (MoU) निवेश प्रक्रिया के दो अलग-अलग स्वाभाविक चरण हैं।
विनोद पांडेय ने कहा कि फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दावोस और यूके दौरे के दौरान कंपनियों ने केवल निवेश की इच्छा जताते हुए LOI सौंपे थे। इसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 8 और 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हितधारक परामर्श-2026 में औपचारिक MoU पर हस्ताक्षर किए गए। जेएमएम ने कहा कि इस स्थापित प्रक्रिया को री-पैकेजिंग या फर्जी बताना भाजपा की अज्ञानता को दर्शाता है, क्योंकि MoU के बाद अब परियोजना रिपोर्ट, भूमि आवंटन और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने दावा किया कि इन निवेश प्रस्तावों से राज्य में 70,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और यही बात भाजपा की परेशानी की मुख्य वजह है। जिंदल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर उठे सवालों का जवाब देते हुए जेएमएम ने कहा कि यह कदम केंद्र सरकार के न्यूक्लियर शांति एक्ट के तहत उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विजन झारखंड को औद्योगिक निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पर्यटन, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है।

