
Antyeshti Sahayata Yojana : राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) अब केवल बीमारों को नया जीवन देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जीवन की अंतिम सांस टूटने के बाद भी शवों को सम्मानजनक विदाई देने में परिजनों का संबल बन रहा है।
रिम्स प्रबंधन द्वारा शुरू की गई सेवा के तहत न सिर्फ शवों को घर तक पहुंचाने के लिए निःशुल्क मोक्ष वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि दाह-संस्कार के लिए परिजनों को 5 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। रिम्स के 62वीं जीबी की बैठक में ये निर्णय लिया गया था। जिसमें अंत्येष्टि सहायता योजना के तहत 5 हजार रुपए मृतक के परिजनों को देने का प्रावधान किया गया है।
अप्रैल तक 300 से ज्यादा लोगों को लाभ
इस संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए रिम्स अप्रैल तक 300 से अधिक जरूरतमंद परिवारों के बीच 16 लाख रुपये की सहायता राशि बांट चुका है। मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए रिम्स प्रबंधन जल्द ही नए मोक्ष वाहन खरीद रहा है। इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
रिम्स के एक अधिकारी ने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन होने वाली मौतों के कारण वर्तमान वाहनों पर दबाव काफी बढ़ गया था। परिजनों को शव घर ले जाने में कोई असुविधा न हो, इसलिए अतिरिक्त वाहनों की जरूरत महसूस की गई।
5,000 की तत्काल मदद
गरीब और बेबस परिवारों के लिए किसी अपने को खोने के दुख के साथ-साथ अंतिम संस्कार का खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती होती है। राज्य सरकार ने इस दर्द को समझा और रिम्स गवर्निंग बॉडी (GB) की मंजूरी के बाद मृतक के परिजनों को तत्काल 5 हजार रुपये देने की व्यवस्था शुरू की। यह सहायता राशि सीधे मृतक के परिजनों के बैंक खाते में भेजी जाती है।
खास बात यह है कि समाज के सक्षम लोग इस योजना का लाभ स्वेच्छा से छोड़ भी रहे हैं। कई परिजनों ने डेथ सर्टिफिकेट के आवेदन में साफ तौर पर लिखा है कि वे आर्थिक रूप से सक्षम हैं और उन्हें इस राशि की आवश्यकता नहीं है, ताकि यह मदद केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।

