

नई दिल्ली: बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर अब लोगों की सेहत और उनकी दिनचर्या पर पड़ने लगा है। एक वैश्विक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बढ़ते तापमान के कारण दुनिया भर में लोगों की नींद खराब हो रही है। इस समस्या से भारत के शहर भी अछूते नहीं हैं। झारखंड की राजधानी रांची के लोग बढ़ती गर्मी के कारण सालभर में औसतन 65 घंटे की नींद खो रहे हैं।





वैश्विक अध्ययन में 1368 शहर शामिल
विश्व के 1368 शहरों पर किए गए इस अध्ययन में दावा किया गया है कि गर्मी के चलते लोग साल में औसतन 56 घंटे की नींद गंवा रहे हैं। इसमें से 10% नींद सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारण कम हो रही है। भारत में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहां लोग औसतन 8 घंटे की नींद खो रहे हैं। इस रिसर्च में भारत के 107 शहरों के पिछले 50 सालों के आंकड़ों को शामिल किया गया है, जिससे पता चलता है कि नींद खोने की यह रफ्तार अब दोगुनी हो चुकी है।
दक्षिण भारत के शहरों में सबसे ज्यादा असर
जारी रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी के कारण दक्षिणी राज्यों के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। वहां लोग साल में करीब 78 से 91 घंटे की नींद कम ले पा रहे हैं, जिसमें से 8-9 घंटे की कमी का सीधा कारण जलवायु परिवर्तन है।
शहरों की ये है स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर और मध्य भारत के शहरों में भी स्थिति चिंताजनक है। लखनऊ में लोग 70 घंटे, मेरठ में 65 घंटे, कानपुर में 70 घंटे, आगरा में 69 घंटे और गुरुग्राम में 68 घंटे की सालाना नींद गंवा रहे हैं। इसके अलावा, पटना में 8 घंटे, अजमेर और जमशेदपुर में 7 घंटे तथा भोपाल, रांची, दिल्ली, गाजियाबाद और देहरादून जैसे शहरों में जलवायु परिवर्तन के सीधे असर के कारण लोगों की नींद में 5 से 6 घंटे की कमी आंकी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में अनिद्रा (Sleeplessness) से जुड़ी शारीरिक और मानसिक बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं।
प्रमुख शहरों में कुल नींद में कमी (घंटे)
चेन्नई 93
मुंबई 84
कोलकाता 80
अहमदाबाद 78
हैदराबाद 75
जमशेदपुर 75
पटना 73
बेंगलुरु 67
दिल्ली 66
रांची 65
