गोस्सनर कॉलेज में आदिवासी समाज के अधिकार और पहचान पर गहन मंथन

गोस्सनर कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और वर्तमान चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा कर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

Archana Ekka
1 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : गोस्सनर कॉलेज के मानवशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का बुधवार को सफल समापन हुआ। 21 और 22 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक प्रावधान व समस्याएं” था। संगोष्ठी में आदिवासी समाज की पहचान, उनके संवैधानिक अधिकार, पारंपरिक ज्ञान और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. मुर्मू के स्वागत भाषण से हुई। मुख्य अतिथि बिशप सीमांत तिर्की ने कहा कि आदिवासी समुदाय जल, जंगल और जमीन का सच्चा संरक्षक है। उन्होंने बताया कि यह समाज लंबे समय से प्रकृति संरक्षण में अहम भूमिका निभाता आ रहा है। साथ ही उन्होंने विस्थापन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से प्रभावी कदम उठाने की अपील की।

दूसरे दिन प्रो. डॉ. एस.एन. मुंडा ने आदिवासी पारंपरिक ज्ञान को पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया। समापन सत्र में प्रो. जोसेफ बारा ने भारतीय राष्ट्रवाद और संविधान निर्माण में आदिवासी समाज के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में प्रो. योताम कुल्लू ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।