

किन्नौर : हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष सेब उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते मौसम, फूल और फल बनने के दौरान बेमौसम ओलावृष्टि तथा बढ़ते तापमान ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार जहां उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत कमी का अनुमान लगा रही है, वहीं कई बागवानों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में यह गिरावट 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसका असर राज्य की करीब 6,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था और इस पर निर्भर लाखों परिवारों की आजीविका पर पड़ना तय माना जा रहा है। हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य के आठ जिलों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक सेब पर आधारित है। इस बार मार्च और अप्रैल में फूल आने तथा फल बनने के दौरान मौसम ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।





विशेषज्ञों के अनुसार असामान्य तापमान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित की। कई इलाकों में रात के समय भी ओले गिरे, जो पहले बेहद कम देखने को मिलते थे। इससे बड़ी संख्या में फल झड़ गए और उत्पादन पर सीधा असर पड़ा। हिमाचल के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार वर्ष 2025 में राज्य में 6.99 लाख मीट्रिक टन (करीब 3.49 करोड़ बॉक्स) सेब का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2026 में इसके घटकर लगभग 4.45 लाख मीट्रिक टन (करीब 2.2 करोड़ बॉक्स) रहने का अनुमान है। यानी उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। हालांकि शिमला जिले के कुमारसैन क्षेत्र के कई बागवानों का कहना है कि निचले और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में उत्पादन 60 प्रतिशत तक घट सकता है।
