सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक प्लेस से कुत्तों को हटाने का दिया था आदेश

हर दिन वैक्सीन लगवाने के लिए सदर में पहुंच रहे 200 से अधिक डॉगबाइट के मरीज
रांची: राजधानी रांची में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के भीतर भी उनकी मौजूदगी मरीजों और उनके परिजनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। अस्पतालों के ओपीडी, वार्ड, गलियारों और इमरजेंसी के अलावा इनडोर में खुलेआम घूमते कुत्ते सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कई जगहों पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ओपीडी में घूम रहे आवारा कुते
अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि कई बार कुत्ते वार्ड और ओपीडी तक पहुंच जाते हैं। जिससे सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को लेकर बना रहता है। मरीजों को हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि कहीं कुत्ते हमला न कर दें। खुले परिसर और सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण कुत्तों का अस्पताल परिसर में प्रवेश आसानी से हो जाता है।
हर दिन 200 अधिक डॉगबाइट केस
हालांकि इस समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था है। प्रवेश द्वारों पर गार्ड तैनात किए गए हैं, ताकि आवारा जानवर अस्पताल के अंदर न आ सकें। इस तरह सरकारी अस्पतालों में ऐसी प्रभावी व्यवस्था अभी भी देखने को नहीं मिलती। कई स्थानों पर कुत्तों को अस्पताल परिसर में घूमते और भोजन की तलाश करते देखा जाता है, जिससे संक्रमण फैलने का भी खतरा बना रहता है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग कुत्तों के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं। सदर अस्पताल में हर महीने छह हजार से अधिक लोग एंटी-रेबीज टीकाकरण के लिए आते हैं, जबकि कई दिन ओपीडी में कुत्ता काटने के 200 से 250 तक मामले दर्ज होते हैं।
12 मरीज रेबीज के मिले
विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। साथ ही बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क कर एंटी-रेबीज वैक्सीन की पूरी खुराक लेना जरूरी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि रेबीज एक घातक बीमारी है। झारखंड में कुछ महीने पहले तक 1 दर्जन रेबीज के मरीजों की पुष्टि हुई थी। जिनका इलाज भी चल रहा था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिलहाल रेबीज राज्य में पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।


