

रांची : प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि एमएमडीआर संशोधन का विरोध कांग्रेस का कोई राजनीतिक शगल नहीं, बल्कि झारखंड के संवैधानिक अधिकार, राज्य के राजस्व, आदिवासी हित और खनिज संपदा की रक्षा की लड़ाई है।





आदित्य साहू को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि संशोधन इतना ही जनहितकारी है तो झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार और राजस्व को लेकर भाजपा इतनी बेचैन क्यों है?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को कांग्रेस मुद्दाविहीन दिखाई देती है क्योंकि कांग्रेस जनता के मुद्दे उठा रही है। बेरोजगारी, छात्रों का भविष्य, विस्थापन, आदिवासियों के अधिकार, खनिज संपदा और राज्य के राजस्व की रक्षा—ये सभी झारखंड की जनता के वास्तविक सवाल हैं। भाजपा इन सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है।
उन्होंने कहा कि आदित्य साहू का यह कहना कि कांग्रेस झारखंड को एटीएम बनाती है, हास्यास्पद है। झारखंड को किसने खनिज संपदा का भंडार समझकर कॉरपोरेट घरानों के लिए खोलने की कोशिश की, यह देश और झारखंड की जनता जानती है। भाजपा को कांग्रेस पर आरोप लगाने से पहले अपने केंद्र सरकार के फैसलों और खनिज क्षेत्र में किए गए बदलावों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
श्री कमलेश ने कहा कि कोयले की तथाकथित “काली कमाई” की बात करने वाले आदित्य साहू पहले यह बताएं कि अवैध खनन, कोयला चोरी और खनिज तस्करी पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है? केंद्र में भाजपा की सरकार है, केंद्रीय एजेंसियां हैं, केंद्रीय सुरक्षा बल हैं और खनिज क्षेत्र से जुड़े केंद्रीय मंत्रालय हैं। फिर चोरी रोकने में विफलता का ठीकरा राज्य सरकार पर क्यों फोड़ा जा रहा है?
उन्होंने कहा कि BCCL को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी भाजपा को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्य और दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। यदि बड़े पैमाने पर चोरी हो रही है तो केंद्र सरकार अब तक क्या कार्रवाई कर रही थी? यदि स्थिति इतनी गंभीर है तो केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने क्या कदम उठाए? जनता को आरोप नहीं, जवाब चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा केवल राजस्व का स्रोत नहीं है, बल्कि यहां की जनता, आदिवासियों और आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति है। MMDR संशोधन के जरिए यदि राज्यों के अधिकार और राजस्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। भाजपा इसे राजनीतिक विरोध कहकर खारिज नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि आदित्य साहू को झारखंड आंदोलन का इतिहास कांग्रेस को पढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। झारखंड के निर्माण में किसने क्या भूमिका निभाई और किसने विरोध किया, इसका पूरा इतिहास जनता के सामने है। भाजपा आज झारखंड की अस्मिता की बात करती है, लेकिन जब राज्य के अधिकार और संसाधनों की बात आती है तो उसकी प्राथमिकता स्पष्ट हो जाती है।
