

रांची: झारखंड के सभी सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस को अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के तहत स्कूल क्वालिटी एसेसमेंट एंड एश्योरेंस फ्रेमवर्क (SQAAF) को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत इस वर्ष से स्कूलों को तय मानकों के आधार पर अपना सेल्फ एसेसमेंट करना होगा। चार प्रदर्शन स्तरों पर आधारित यह व्यवस्था स्कूलों को अपनी वर्तमान स्थिति समझने, कमियों को चिन्हित करने और सुधार का लक्ष्य तय करने में मदद करेगी। इसके लिए स्कूलों को अपने मूल्यांकन के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य भी सुरक्षित रखने होंगे।





सेल्फ एसेसमेंट के बाद प्रत्येक विद्यालय को सात प्रमुख क्षेत्रों में सामने आई कमियों के आधार पर एक विस्तृत सुधार योजना तैयार करनी होगी। इस योजना में सुधार के क्षेत्र की जाने वाली कार्रवाई, जिम्मेदारियों का बंटवारा, निगरानी की व्यवस्था और छात्रों के सीखने के स्तर में संभावित प्रगति को स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह ढांचा केवल बुनियादी ढांचे या परीक्षा परिणामों तक सीमित न होकर शिक्षण की गुणवत्ता, स्कूल प्रबंधन और नेतृत्व को बेहतर बनाने पर केंद्रित है, जिससे छात्र सीधे लाभान्वित होंगे।
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के नोडल अधिकारी के अनुसार यह व्यवस्था केवल निरीक्षण के लिए कागजात तैयार करने के बजाय योजना, उसके क्रियान्वयन और वास्तविक सुधार के सबूतों पर जोर देती है। स्कूलों को तय मानकों के अनुसार सभी प्रासंगिक साक्ष्य उपलब्ध कराने होंगे, ताकि प्रभावी निगरानी की जा सके। यह ढांचा मुख्य रूप से पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, बुनियादी ढांचा, मानव संसाधन, समावेशी शिक्षा, प्रबंधन और लाभार्थियों की संतुष्टि जैसे अंतर-संबंधित क्षेत्रों को शामिल करता है, जो किसी भी विद्यालय की गुणवत्ता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
