

रांची: मतदाता सूची में नाम बचाने की कवायद के बीच रांची में आवासीय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने वाले आवेदनों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत जिन अनलिंक्ड मतदाताओं की मैपिंग पुराने रिकॉर्ड से नहीं हो पाई है, उन्हें नोटिस जारी कर सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (एईआरओ) के समक्ष सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। सुनवाई के दौरान अपना पक्ष और दावा मजबूत करने के उद्देश्य से मतदाता समय रहते सभी जरूरी कागजात जुटाने में लग गए हैं। मतदाता पहचान पत्र के सत्यापन के लिए पासपोर्ट, आवासीय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, मैट्रिक प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और पुराने एसआईआर की प्रति जैसे दस्तावेजों का सहारा लिया जा रहा है।





सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए इसे तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में जारी नोटिस, पहचान और वर्तमान मतदाता रिकॉर्ड का मिलान होता है। दूसरे चरण में नाम, पता, जन्मतिथि तथा माता-पिता के विवरण की जांच की जाती है, जबकि तीसरे चरण में जमा किए गए दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड का मिलान कर लिंक स्थापित किया जाता है। इसके अलावा जन्म वर्ष के हिसाब से दस्तावेजों की आवश्यकता तय की गई है, जिसमें 1950 से 1987 तक जन्मे मतदाताओं को एक, 1987 से 2004 तक जन्मे मतदाताओं को दो, और 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को माता-पिता दोनों के कुल तीन मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने अनिवार्य किए गए हैं। इसी वजह से अंचल कार्यालयों में सुबह से ही प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
