वाम, तृणमूल सरकारों ने बंगाली हिंदुओं की संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की : शुभेंदु

शुभेंदु अधिकारी ने वाम और तृणमूल पर बंगाली हिंदुओं की सांस्कृतिक परंपराओं को कमजोर करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा सरकार ने विरासत और धार्मिक रीति-रिवाज बहाल करने का दावा किया।

Razi Ahmad
5 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय तक सत्ता में रहे वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस ने बंगाली हिंदुओं की सांस्कृतिक परंपराओं को खत्म करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार बंगाली हिंदुओं से जुड़ी ‘विरासत और परंपराओं’ को फिर से बहाल करने की कोशिश कर रही है।

शुभेंदु ने केस्टोपुर में गणेश पूजा का उद्घाटन करने के बाद कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश लगभग पांच दशकों से जारी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में 34 साल के वाम मोर्चा शासन और 15 साल के तृणमूल कांग्रेस शासन का जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने जेल में बंद बांग्लादेशी हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की दयनीय स्थिति का भी उल्लेख किया जो मीडिया में प्रकाशित नवीनतम तस्वीरों से इंगित होता है।

संबंधित तस्वीरों में चिन्मय कृष्ण दास प्रभु अपनी मां के पार्थिव शरीर के पास दुखी हालत में दिखते हैं।

शुभेंदु ने कहा, ‘‘चिन्मय प्रभु के आंसुओं ने दुनिया भर के ‘सनातनियों’ को झकझोर दिया है।’’

उनका यह बयान तृणमूल कांग्रेस द्वारा शुक्रवार को बांग्लादेशी हिंदू संत की दुर्दशा पर कथित तौर पर चुप्पी साधे रखने के लिए भाजपा की आलोचना किए जाने के एक दिन बाद आया है।

शुभेंदु ने बंटवारे के समय पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की दुर्दशा का भी जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वामपंथी शासन के दौरान पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों, धार्मिक ग्रंथों और त्योहारों को ‘‘जानबूझकर हाशिए पर धकेल दिया गया’’।

उन्होंने दावा किया कि उस दौरान पूजा पंडालों में वामपंथी नेताओं-कार्ल मार्क्स और व्लादिमीर लेनिन की किताबें तो मिल जाती थीं, लेकिन स्वामी विवेकानंद, स्वामी प्रणवानंद और रामकृष्ण मिशन से जुड़ी रचनाएं वहां नहीं होती थीं।

शुभेंदु ने आरोप लगाया, ‘‘जिन लोगों ने 34 साल तक पश्चिम बंगाल पर शासन किया, वे नहीं चाहते थे कि हम अपनी धार्मिक परंपराओं, धर्मग्रंथों और रीति-रिवाजों के बारे में लिखें या उनका पालन करें।’’

उन्होंने दावा किया कि तृणमूल सरकार के 15 साल के शासन के दौरान धर्म, भाषा और त्योहारों के नाम पर लोगों के बीच ‘फूट डालने’ की कोशिश की गईं।

शुभेंदु ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लिए बिना कहा कि पूर्व में मुहर्रम की वजह से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा दी गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान पंचांग में जो कुछ भी लिखा है, उसका पालन किया जाएगा।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम दुर्गा पूजा से जुड़े पारंपरिक पंचांग और रीति-रिवाजों का अनुपालन करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

उन्होंने लोगों से अपनी पहचान, धर्म, विरासत और परंपराओं को बनाए रखने के लिए एकजुट रहने की अपील की।

शुभेंदु ने गणेश पूजा और छठ जैसे त्योहारों के सांस्कृतिक महत्व को बढ़ाने की भी वकालत की और कहा कि ऐसे उत्सव किसी खास इलाके या समुदाय तक सीमित नहीं रहने चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘गणेश पूजा सिर्फ महाराष्ट्र का त्योहार नहीं है। यह दुनिया भर के सनातनियों का है।’’

शुभेंदु ने कहा कि उनकी सरकार समुदायों और भाषाई समूहों के बीच बनी ‘दीवारों’ को तोड़ना चाहती है और एक व्यापक भारतीय पहचान पर जोर देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने निर्देश दिए हैं कि दुर्गा पूजा की शुरुआत ‘देवी पक्ष’ के शुभ मुहूर्त से शुरू हों और ‘महालय’ व ‘महाष्टमी’ से जुड़ी पारंपरिक रीतियों को बनाए रखा जाए।

उन्होंने लोगों से राज्य के विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ते हुए बंगाल की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने का आह्वान किया।

शुभेंदु ने बाद में दमदम इलाके में मॉल रोड पर एक और गणेश पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। उन्होंने मंत्रोच्चारण के बीच पूजा अर्चना की और गणपति की ‘आरती’ की।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।