हजारीबाग : शहर के हुरहुरू स्थित कैंटोनमेंट मौजा की बेशकीमती खास महल जमीन एक बार फिर चर्चा में है। जिस जमीन पर जून और अगस्त 2026 में प्रशासनिक हस्तक्षेप कर कथित अतिक्रमण और निर्माण कार्य रुकवाया गया था, उसी जमीन पर अब जानवरों का खटाल बनाए जाने का मामला सामने आया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद सरकारी जमीन को कब्जे से बचाने के लिए स्थायी इंतजाम क्यों नहीं किए गए। मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि 50 डिसमिल खास महल जमीन को लेकर जून में सदर अंचलाधिकारी और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के बीच मौके पर तीखी बहस तक हुई थी। उस समय प्रशासन की ओर से घेराबंदी और निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई गई थी। योगेंद्र साव ने जमीन से संबंधित दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा था, जबकि प्रशासन ने भूमि अभिलेखों की जांच की बात कही थी।
जून में रोका गया था निर्माण
15 जून को हुरहुरू की इसी जमीन पर चहारदीवारी एवं निर्माण कार्य की सूचना पर सदर अंचलाधिकारी मौके पर पहुंचे थे और निर्माण कार्य रुकवाया था। जमीन को लेकर दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद 18 जून और 19 जुलाई को भी प्रशासनिक टीम ने कथित रूप से जमीन की घेराबंदी और निर्माण के प्रयासों में हस्तक्षेप किया। 3 अगस्त को प्रशासन ने विवादित सरकारी भूखंड पर लगाए गए ढांचे और घेराबंदी को हटाने की कार्रवाई भी की। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भूमि के पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि अभिलेखों की जांच में हुई थी।
फिर खटाल कैसे बन गया?
अब उसी जमीन पर जानवरों का खटाल बनाए जाने की बात सामने आने के बाद प्रशासन की पिछली कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कार्रवाई के बाद यदि जमीन की स्थायी घेराबंदी, सरकारी बोर्ड और नियमित निगरानी की जाती तो दोबारा निर्माण अथवा कब्जे की स्थिति नहीं बनती। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन स्वयं इस भूखंड को लेकर कई बार कार्रवाई कर चुका है, तो फिर कार्रवाई के बाद जमीन को उसी स्थिति में क्यों छोड़ दिया गया?
नैन्सी सहाय के समय से चल रही थी कब्जे की कोशिश
स्थानीय लोगों के अनुसार, हुरहुरू की इस जमीन पर कब्जे की कोशिश कोई नई बात नहीं है। पूर्व उपायुक्त नैन्सी सहाय के कार्यकाल में भी जमीन को लेकर विवाद और अतिक्रमण की कोशिशें सामने आई थीं। उस समय प्रशासन ने जमीन पर कब्जा रोकने में सफलता हासिल की थी। अब सवाल उठ रहा है कि इतने पुराने विवाद के बावजूद जमीन की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
796.17 एकड़ खास महल जमीन का प्रशासन कर चुका है सर्वे
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जिला प्रशासन ने पूरे हजारीबाग में खास महल जमीन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए बड़ा अभियान चलाया है। जून में उपायुक्त हेमंत सती की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद जिले के 22 मौजों में 796.17 एकड़ खास महल जमीन का सर्वे कराने का निर्णय लिया गया था। सर्वे का उद्देश्य लीज नवीकरण, नामांतरण, हस्तांतरण, प्रयोजन परिवर्तन, पुनर्ग्रहण और अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति का पता लगाना था।
प्रशासन की कार्रवाई पर अब सवाल
हुरहुरू की जमीन का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त में प्रशासन ने खास महल भूमि पर बने एक पुराने होटल को भी ध्वस्त किया था। यानी प्रशासन अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन दूसरी ओर हुरहुरू के इस भूखंड पर बार-बार कब्जे की कोशिश की शिकायत सामने आना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन नए बने खटाल को अतिक्रमण मानकर क्या कार्रवाई करता है, जमीन की दोबारा मापी कराता है या नहीं और सरकारी भूमि की स्थायी सुरक्षा के लिए घेराबंदी एवं सरकारी बोर्ड लगाता है या नहीं।
हुरहुरू की बेशकीमती खास महल जमीन पर फिर उठे सवाल, अब पूर्व मंत्री ने बना दिया जानवरों का खटाल
हजारीबाग के हुरहुरू में बेशकीमती खास महल जमीन पर फिर कब्जे का मामला सामने आया। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के नाम से जुड़े भूखंड पर जानवरों का खटाल बनाया गया।

