एडीजे ने 97 मामले वापस लिए जाने पर उठाया सवाल, कहा- न्यायाधीश के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए

Archana Ekka
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मुजफ्फरनगर (उप्र) : मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रवि कुमार दिवाकर ने अपनी अदालत से हत्या समेत 97 गंभीर आपराधिक मामलों को स्थानांतरित किए जाने पर सवाल उठाए और पूछा कि जब न्यायाधीश के साथ ही अन्याय हो तो वह कहां जाए। एडीजे दिवाकर ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में सुनवाई शुरू हो चुकी है, उन्हें तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना केवल प्रशासनिक आदेश के ज़रिए वापस नहीं लिया जा सकता। उन्होंने इस कार्रवाई को कानून के विरुद्ध और क्षेत्राधिकार विहीन करार दिया।

उन्होंने यह टिप्पणी स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के 10 साल पुराने मामले में साक्ष्यों के अभाव के कारण अशोक भारती नामक व्यक्ति को बरी करते हुए की। भारती पर 2015 में 150 ग्राम मादक पदार्थ रखने का आरोप था। यह पूरा विवाद 18 अगस्त को तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उनकी ओर से जारी नौ प्रशासनिक आदेशों से जुड़ा है। इसके तहत एडीजे दिवाकर की अदालत में विचाराधीन 97 मामले वापस ले लिए गए थे, लेकिन आदेश में इसका कोई कारण दर्ज नहीं था। न्यायाधीश दिवाकर ने सवाल किया कि क्या कोई न्यायिक अधिकारी अपने वरिष्ठ के ऐसे प्रशासनिक आदेश को मानने के लिए बाध्य है जो कानून या तय निर्देशों के विपरीत हो। इसके साथ ही उन्होंने बिना कानूनी आधार के दूसरी अदालतों में स्थानांतरित किए गए मामलों के फैसलों की वैधता पर भी प्रश्न चिह्न लगाया।

न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक शक्तियों का उपयोग तय सीमाओं, विवेक और स्पष्ट कारणों के साथ होना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि अनियंत्रित अधिकार व्यवस्था को उत्पीड़न का साधन बना सकता है। उल्लेखनीय है कि एडीजे दिवाकर इस वर्ष 11 मामलों में 23 आरोपियों को मौत की सजा सुनाने के बाद चर्चा में आए थे। उन्होंने 23वीं मौत की सजा सात सितंबर को सुनाई थी और उनकी अदालत से मामलों का यह स्थानांतरण इन फैसलों के बाद हुआ। इससे एक दिन पहले ही उन्होंने दशक भर चले एक मुकदमे का जिक्र करते हुए 1993 की हिंदी फिल्म ‘दामिनी’ के प्रसिद्ध संवाद “तारीख पर तारीख” का हवाला दिया था।
उन्होंने कहा था कि 10 साल तक अदालती कार्यवाही का मानसिक आघात सहना अपने आप में एक बड़ी सजा है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।