रोजगार आंकड़ों में महिलाओं की श्रम भागीदारी में बड़ा अंतर, सूरत में भागीदारी दर सबसे अधिक

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSSO) के पहले जिला स्तरीय श्रम बाजार अनुमानों के अनुसार, देश के 58 प्रतिशत जिलों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर कम से कम 40 प्रतिशत दर्ज की गई है।

Razi Ahmad
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नयी दिल्ली: देश के पहले जिला स्तरीय श्रम बाजार अनुमानों में रोजगार भागीदारी में बड़ा अंतर सामने आया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 58 प्रतिशत जिलों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर कम से कम 40 प्रतिशत रही।

आंकड़ों के अनुसार देश के अधिकांश हिस्सों में बेरोजगारी दर 0.5 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत के बीच रही।

संशोधित आवधिक यानी नियमित श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के तहत जारी इन आंकड़ों में पहली बार श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), बेरोजगारी दर और एनईईटी (रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर युवा) के जिलास्तरीय अनुमान जारी किए गए हैं।

प्रमुख जिलों के बीच गुजरात के सूरत में 68.6 प्रतिशत के साथ उच्चतम श्रम बल भागीदारी दर और 67.8 प्रतिशत के साथ श्रमिक जनसंख्या अनुपात दर्ज किया गया। इसके बाद बिहार के अररिया और तमिलनाडु के सलेम का स्थान रहा।

बिहार के दरभंगा में दोनों ही पैमानों पर सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया। तीन-चौथाई से अधिक जिलों ने 30 प्रतिशत से कम एनईईटी दर (15-29 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे युवाओं का हिस्सा जो न तो रोजगार में हैं, न ही शिक्षा या प्रशिक्षण में) दर्ज की।

देश के लगभग 98 प्रतिशत जिलों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए श्रम बल भागीदारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 40 से 80 प्रतिशत के दायरे में रहा। देश के 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात 37.3 प्रतिशत से 76.7 प्रतिशत के बीच रहा।

आंकड़ों से जिलों के बीच श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा अंतर सामने आया है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में सबसे अधिक 80.9 प्रतिशत महिला एलएफपीआर दर्ज की गई। इसके बाद यह आंकड़ा जम्मू-कश्मीर के बडगाम में 71.4 प्रतिशत, ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 69 प्रतिशत रहा।

निचले स्तर पर पूर्वी दिल्ली में यह दर 18.9 प्रतिशत, बिहार के सीवान में 24.7 प्रतिशत और पंजाब के पटियाला में 39.3 प्रतिशत दर्ज की गई। कुल मिलाकर, लगभग 57.8 प्रतिशत जिलों में महिला एलएफपीआर 40 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज की गई।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।