आईएसएफ ने चुनाव चिह्न बदलने के निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ किया अदालत का रुख

आईएसएफ ने निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव चिह्न बदलने के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी। पार्टी ने डेमोक्रेटिक टीएमसी को ‘लिफाफा’ चिन्ह आवंटित करने पर आपत्ति जताई।

Razi Ahmad
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कोलकाता: इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनाव के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव चिह्न बदले जाने के खिलाफ सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया।

सूत्रों ने बताया कि आईएसएफ ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट को अपना चुनाव चिह्न आवंटित करने के आयोग के फैसले को चुनौती दी है।

ऋतब्रत गुट को अब ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ कहा जाता है।

अदालत इस सप्ताह के अंत में याचिका पर सुनवाई कर सकती है। आयोग ने शुक्रवार को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित कर दिया जबकि पहले यह चुनावी निशान आईएसएफ इस्तेमाल करती थी।

नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली आईएसएफ का चुनाव चिह्न बदलकर ‘अलमारी’ कर दिया गया है, जिससे पार्टी में नाराजगी है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को खत्म करते हुए आईएसएफ ने छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव के लिए अली मोहम्मद सबे मिराज खान को अपना उम्मीदवार बनाया है।

सिद्दीकी ने कहा, “हमने ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न के साथ 2026 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। आगामी चुनाव उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने हमसे परामर्श किए बिना एकतरफा तरीके से हमारा चुनाव चिह्न कैसे बदला?”

उन्होंने सवाल किया कि पहले अस्तित्वहीन रही डेमोक्रेटिक टीएमसी रातों-रात अचानक “मान्यता प्राप्त पार्टी” कैसे बन सकती है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।