जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा धांधली: मिथिलेश सिंह के लिंक से ही सिंडिकेटों तक पहुंचे थे सीजीएल के पेपर, सीआईडी जांच में बड़ा खुलासा

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा अनियमितताओं की सीआईडी जांच में पेपर लीक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। मिथिलेश सिंह की भूमिका और कई अभ्यर्थियों से पूछताछ जांच के दायरे में है।

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रांची: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की सीआईडी जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क और धांधली के केंद्र में ‘आसियान’ के निदेशक मिथिलेश सिंह की मुख्य भूमिका रही है। मिथिलेश के सीधे संपर्क और लिंक के जरिए ही अलग-अलग पेपर लीक करने वाले सिंडिकेटों तक सीजीएल परीक्षा के प्रश्न पत्र परीक्षा से एक दिन पहले उपलब्ध कराए गए थे। फिलहाल आरोपी मिथिलेश सीआईडी की पकड़ से बाहर है और लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, मिथिलेश के संपर्क के माध्यम से ही सबसे पहले पटना के रजनीश ने प्रश्न पत्र का जुगाड़ किया था। इसके बाद उसने कोलकाता और नियमानंद के विभिन्न होटलों में अभ्यर्थियों को ले जाकर प्रश्न पत्र के उत्तर रटवाए थे। इसी तरह पटना के ही गब्बर नामक व्यक्ति ने भी नियमानंद के होटल में छात्रों को ले जाकर प्रश्नोत्तर रटवाने का काम किया। इसके अतिरिक्त, नेपाल के बीरगंज जाने वाले प्रश्न पत्र लीक गिरोह के 28 अभ्यर्थियों को भी मिथिलेश के नेटवर्क के जरिए ही सवाल-जवाब मुहैया कराए गए थे। वहीं, बोकारो के सानंद प्रकाश के माध्यम से मिथिलेश ने एक दर्जन से अधिक छात्रों को प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए थे।

मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए सीआईडी ने 28 अगस्त को गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों विजय कुमार तिवारी और दीपक कुमार को रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ की। दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि बोकारो के सेक्टर-1 में परीक्षा से ठीक एक दिन पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नोत्तर रटवाए गए थे। पूछताछ के दौरान उन्होंने मिथिलेश सिंह और सानंद प्रकाश की भूमिका का खुलासा करने के साथ-साथ उन सभी अभ्यर्थियों के नाम भी उजागर किए हैं जो उस वक्त मौके पर मौजूद थे। इसी कड़ी में सीआईडी एसआईटी (SIT) ने सोमवार को 25 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की है और मंगलवार को भी 25 अन्य अभ्यर्थियों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है।

14वीं जेपीएससी में अभय तिवारी का एजेंट था लालू

जांच के दौरान सीआईडी को हजारीबाग के कोर्रा निवासी लालू यादव के खिलाफ भी अहम साक्ष्य मिले हैं। लालू 14वीं जेपीएससी और एफआरओ (FRO) परीक्षा में अनियमितता के मामले में संदिग्ध भूमिका में है। सामने आया है कि लालू ने अनुचित साधनों का लाभ लेने के साथ-साथ अभ्यर्थियों और मुख्य आरोपी अभय तिवारी के बीच एजेंट (कड़ी) के रूप में काम किया था। अभय तिवारी के इकबालिया बयान में भी लालू को उसका एजेंट बताया गया है। सीआईडी ने पाया है कि लालू 14वीं जेपीएससी पीटी और एफआरओ परीक्षा दोनों में सफल रहा था, जिससे उसकी सफलता को कथित अनुचित साधनों के जरिए हासिल लाभ से जोड़कर देखा जा रहा है।

मामले की गहराई से जांच कर रही सीआईडी की टीम ने जब लालू के घर की तलाशी ली, तो वहां से अभय के हस्ताक्षर वाला 8 लाख रुपये का एक चेक बरामद हुआ। इसके साथ ही अलग-अलग खातों के कई बैंक चेक और एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति की तीन कारें भी मिली हैं। सीआईडी के अनुसार, जांच से इस बात के स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि लालू न केवल स्वयं परीक्षा में धांधली में शामिल था, बल्कि परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े वित्तीय लेनदेन में भी उसकी सक्रिय भूमिका थी। दस्तावेजों की जांच में लालू की पत्नी के बैंक खाते में 1.40 लाख रुपये के लेन-देन (ट्रांजैक्शन) की जानकारी भी सामने आई है, जिसको लेकर आगे की वित्तीय जांच जारी है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।