रांची: राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की बैठक में आदिवासी धर्मकोड, परिसीमन सहित अन्य प्रमुख मांगों को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत आगामी 21 फरवरी 2027 को रांची में ‘आदिवासी बचाओ महारैली’ का आयोजन किया जाएगा। रांची स्थित पुराने विधानसभा सभागार में आयोजित इस बैठक में झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक के बाद के पूर्व मंत्री देवकुमार धान ने बताया कि आदिवासी धर्मकोड के मुद्दे पर देश भर के आदिवासी एकजुट हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए कोर कमेटी के साथ-साथ राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर भी कमेटियों का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही, 1 दिसंबर को महाराष्ट्र के नासिक से एक न्याय मार्च निकाला जाएगा, जो 15 दिसंबर को दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन में बदल जाएगा।
पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि आदिवासियों की अपनी एक विशिष्ट पहचान है और वे ही इस देश के असली मालिक हैं। वहीं, महाराष्ट्र से आईं लक्ष्मीबाई जाधव ने कहा कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं। 1951 की जनगणना तक आदिवासियों के लिए अलग कॉलम हुआ करता था जिसे 1961 में हटा दिया गया। समिति का लक्ष्य देशभर में जागरूकता अभियान चलाकर जनगणना प्रपत्र में 15 करोड़ आदिवासियों द्वारा अलग धर्मकोड दर्ज कराने की पहल करना है।


