गया: बिहार के गया जी में जारी पितृपक्ष मेले के दौरान शुक्रवार को कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के तट पर पिंडदान किया। जिले में 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष मेला आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान श्रद्धालु फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंड वेदियों पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। फ्रांस, रूस, जर्मनी, इटली, यूक्रेन, घाना और लातविया समेत कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान किया। पारंपरिक भारतीय परिधान, जैसे साड़ी और धोती-कुर्ता पहने श्रद्धालुओं ने पवित्र स्थलों पर पूजा-अर्चना की और अपने दिवंगत परिजनों एवं मित्रों को याद किया।

धार्मिक गुरु लोकनाथ गौर ने कहा, ‘‘लोग यहां अपने बेटों, पतियों, भाइयों और अन्य रिश्तेदारों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने आते हैं। इटली, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड समेत कई यूरोपीय देशों से श्रद्धालु यहां अनुष्ठान करने पहुंचे हैं। दो दिन में तीन समूहों में 48 लोग आए हैं। घाना जैसे अफ्रीकी देशों से भी कुछ लोग आए हैं।’’
उन्होंने ऐसे श्रद्धालुओं के बारे में भी बताया, जो दुखद परिस्थितियों में अपने प्रियजन को खोने के बाद गया जी पहुंचे हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है, जिसकी महिला मित्र की आंखों के सामने नदी में डूबने से मौत हो गई थी। इटली के मिलान से पहली बार गया जी पहुंचीं नतालिया ने अपने पूर्वजों की पूजा करने का अवसर मिलने पर आभार जताया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां आकर बहुत खुश हूं। अपने पूर्वजों की पूजा करने का अवसर देने के लिए मैं इस धरती के प्रति आभार व्यक्त करती हूं।’’ जर्मनी से आई एक अन्य युवती ने भी कहा कि गया जी में अपने पूर्वजों के लिए अनुष्ठान करने को लेकर वह ‘‘खुश और धन्य’’ महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘गया जी एक विशेष स्थान है, जहां एक अनूठी ऊर्जा महसूस होती है।’’ हिंदू धर्म और भगवान कृष्ण को समझने के लिए वह करीब पांच वर्षों से सप्ताह में एक बार भगवद्गीता पढ़ रही हैं। एक अन्य महिला श्रद्धालु ने बताया कि उनके समूह ने इन धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी एक साल पहले से शुरू कर दी थी। इस दौरान उन्होंने संबंधित कथाएं पढ़ीं और इन अनुष्ठानों के महत्व को समझा।


