रांची: झारखंड में बहुचर्चित जेपीएससी (JPSC) मेधा घोटाले की जांच का दायरा अब काफी व्यापक हो गया है। सीआईडी द्वारा अब तक की गई कार्रवाई में 27 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिनमें जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते और पूर्व परीक्षा नियंत्रक शिखा गुप्ता समेत कई वरिष्ठ अधिकारी व सफल अभ्यर्थी शामिल हैं। हाल ही में 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित सेंटिंग के जरिए सफल होने के आरोप में सुमन सोरेन, दीपक राणा, ओमप्रकाश राय, उमाकांत उरांव, रोशन केरकट्टा और मनोज कुमार को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, सहायक वन संरक्षक से परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं के दौरान धांधली के आरोपी अभ्यर्थी भी जेल भेजे गए हैं।

अब सीआईडी का पूरा ध्यान टीडीपीएल (TDPL) यानी मैसर्स टीसीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से आयोजित सभी 21 परीक्षाओं की जांच पर केंद्रित हो गया है। जांच एजेंसी ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेज जैसे ओएमआर शीट में हेरफेर, पेपर लीक और कट-ऑफ सेटिंग से संबंधित अहम साक्ष्य जुटा लिए हैं। तीन परीक्षाओं के बाद नियुक्त हो चुके 462 अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है और उन्हें जल्द ही समन भेजा जाएगा। वर्तमान में सीआईडी 14वीं एफएओ (FAO) और एफएसओ (FSO) परीक्षाओं की जांच कर रही है, जबकि सिविल सेवा परीक्षा 2023 की जांच भी जारी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीआईडी की छह विशेष टीमों का गठन किया गया है जो जेपीएससी से संबंधित सभी परीक्षा दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच को आगे बढ़ा रही हैं।


