बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मौजूदा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 के आवेदनों का इस्तेमाल कर मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ‘‘राजनीतिक साजिश’’ कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करेगी। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि एक बूथ से दूसरे बूथ पर नाम ‘‘स्थानांतरित’’ करने और अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, दलितों तथा गरीब लोगों के नाम हटाने के प्रयास किये जा रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा की कर्नाटक इकाई के नेताओं को ऐसी राजनीतिक साजिश नहीं करनी चाहिए। यह शर्मनाक है। लोकतंत्र में चुनाव निर्वाचन प्रक्रिया के जरिये जीते जाने चाहिए।’’

मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अब वे (भाजपा) राज्यपाल से संरक्षण मांग रहे हैं और कह रहे हैं कि शिकायतकर्ताओं को फॉर्म-7 या चुनाव से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज करने का अधिकार नहीं है।’’ वह मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं द्वारा कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से हस्तक्षेप करने और मतदाता सूची के एसआईआर में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कथित ‘‘अनुचित हस्तक्षेप’’ को रोकने का निर्देश देने के अनुरोध का जिक्र कर रहे थे। राजग नेताओं ने फॉर्म-7 के जरिये आपत्तियां दर्ज कराने वाले लोगों के खिलाफ ‘‘झूठे और बेबुनियाद’’ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने से रोकने की भी मांग की थी। फॉर्म-7 मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने या हटाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मतदाता आवेदन पत्र है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने फॉर्म-7 आवेदन जमा करने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में इन भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार के सभी सदस्यों ने भी आवेदन जमा किए थे। शिवकुमार ने कहा कि मीडिया की खबरों में कुछ मामलों की जांच की गई और भाजपा कार्यकर्ताओं तथा उनके परिवार के सदस्यों ने फॉर्म-7 जमा करने की बात स्वीकार करते हुए अपने फोन नंबर और आधार का विवरण दिया था। शिवकुमार ने कथित तौर पर फर्जी फॉर्म-7 आवेदन जमा करने वालों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अब उन्हें थाने जाना होगा।’’


