नयी दिल्ली: वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने राज्य स्तरीय बैंकर समितियों (एसएलबीसी) और केंद्रशासित प्रदेश स्तरीय बैंकर समितियों (यूटीएलबीसी) से प्रमुख सरकारी योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति (एससी) के लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत के बारे में अनिवार्य रूप से जानकारी देने को कहा है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के हस्तक्षेप के बाद डीएफएस ने ये निर्देश जारी किए।
विभाग ने एसएलबीसी और यूटीएलबीसी के संयोजकों से अपनी आवधिक समीक्षा बैठकों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंडअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई और एमएसएमई व्यावसायिक ऋण जैसी योजनाओं के तहत एससी लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत का योजनावार तथा बैंकवार ब्योरा देने को कहा है।
यह जानकारी नियमित रूप से एनसीएससी के साथ साझा करने और आंकड़ों की उपलब्धता तथा संकलन से जुड़ी किसी भी समस्या के विवरण सहित नौ अक्टूबर तक डीएफएस को कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने को भी कहा गया है।
विभाग ने आगे निर्देश दिया कि यह सूचना बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के पास पहले से उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग करके दी जाए, ताकि समानांतर रिपोर्टिंग व्यवस्था बनाए बिना परिभाषाओं और कार्यप्रणाली में एकरूपता सुनिश्चित की जाए।
एसएलबीसी और यूटीएलबीसी से 30 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की जानकारी देने को भी कहा गया है। ये निर्देश एनसीएससी सचिव विवेक कुमार देवांगन द्वारा 24 सितंबर को डीएफएस सचिव को लिखे गए एक पत्र के बाद जारी किए गए।


