व्यापार, कच्चे तेल की अनिश्चितताओं से पूंजी आकर्षित करना भारत के लिए चुनौती: वित्त मंत्रालय रिपोर्ट

वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों से भारत में पूंजी प्रवाह प्रभावित; वित्त मंत्रालय की समीक्षा रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर।

Razi Ahmad
5 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नयी दिल्ली: भारत को अन्य विकासशील देशों की तरह पूंजी प्रवाह आकर्षित करने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े घटनाक्रमों में भारत के लिए अवसरों की कमी देश की निवेश लाने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। वित्त मंत्रालय की बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

मंत्रालय की सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि इस साल जुलाई-अगस्त के जीएसटी संग्रह, निर्यात आंकड़े समेत उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक अप्रैल-जून, तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी वृद्धि के बाद आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार में कुछ नरमी का संकेत देते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक परिस्थितियां एक बार फिर प्रतिकूल हो गई हैं। सितंबर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और भारतीय मुद्रा पर निकट अवधि में दबाव बना हुआ है।

मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया, ‘‘वैश्विक और उससे उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितता का मतलब है कि भारत कोविड के बाद की वृद्धि की उपलब्धियों पर निर्भर होकर नहीं रह सकता। इसे हर तिमाही अर्जित करना होगा। यही नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती है।’’

रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘कारोबार के अनुकूल के बजाय अधिक प्रतिस्पर्धा के अनुकूल’ बनाने की जरूरत की बात कही गयी है। इसमें कहा गया कि केवल प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था ही सफल, नवोन्मेषी और विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था बन सकती है।

अमेरिका के साथ ‘अस्थिर’ व्यापार संबंध, कृत्रिम मेधा के चलते वैश्विक स्तर पर पूंजी निवेश और सीमापार पूंजी प्रवाह में बदलाव तथा विकसित देशों द्वारा अपनी विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए निवेश हासिल करने की होड़ ने विकासशील देशों के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत को अन्य विकासशील देशों की तरह, पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, संकेत हैं कि शुद्ध आधार पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह इस वित्त वर्ष में पिछले साल की तुलना में बेहतर रह सकता है।’’

इसमें कहा गया है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती देश के लिए एक बड़ी ताकत है।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘समय के साथ निवेशक कोविड के बाद के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती और लगातार ऊंची वृद्धि को महत्व देंगे। फिलहाल भारत में निवेशकों की दिलचस्पी कम नहीं है, लेकिन वे सतर्क हैं।’’

मासिक समीक्षा में कहा गया, ‘‘अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों की स्थिति, शुल्क संबंधी दबाव, कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता तथा वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा से जुड़े घटनाक्रमों में भारत से जुड़ी संभावनाओं का अभाव भारत की स्थिति को आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में प्रभावित कर रहा है।’’

समय के साथ इन चुनौतियों के कम होने पर भारत की वृद्धि क्षमता निवेशकों का ध्यान आकर्षित करेगी।

रिपोर्ट ने आगाह किया कि दिखने वाली आपसी मित्रता के बावजूद वैश्विक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति तेज हो रही है। ऊर्जा, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य और सेमीकंडक्टर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक आपूर्ति संबंधी झटके उभरने लगे हैं।

जलवायु, वैश्विक स्थिति और मौद्रिक दबावों के एक साथ बढ़ने से भारत के आर्थिक परिदृश्य में मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ सकता है। आपूर्ति संबंधी झटकों से पैदा होने वाली महंगाई आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करेगी।

इसमें कहा गया कि विकसित देशों में ब्याज दरें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका असर घरेलू बॉण्ड प्रतिफल पर भी पड़ेगा। साथ ही, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के बीच ऊंची ब्याज दरें कई निवेशकों को अपने घरेलू बाजारों में निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित करेंगी, जिससे सीमापार पूंजी प्रवाह धीमा हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, लगातार उच्च गुणवत्ता वाले, स्थिर और अपेक्षाकृत तेज फैसले निवेशकों को भरोसा दिलाएंगे। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि

भारत को अर्थव्यवस्था को कारोबार के अनुकूल बनाने के बजाय अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर काम करना चाहिए।

केवल प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था ही सफल, नवोन्मेषी और विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था बन सकती है।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।