रांची: राजधानी रांची में स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। संयुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त अनुज प्रसाद के नेतृत्व में शुक्रवार देर शाम मोरहाबादी वेंडर मार्केट में औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान कुल 40 स्टॉलों का निरीक्षण कर 22 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए, जिनमें से कई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बावजूद मामूली फाइन लगाकर वेंडर्स को छोड़ दिया गया। जिससे साफ है कि विभाग भी कार्रवाई के नाम पर केवल आईवाश करने में लगा है।

जांच के दौरान पनीर के दो नमूने फेल हो गए, जबकि चाट के नमूनों में खतरनाक औद्योगिक रंगों के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इसके अलावा सॉस में इस्तेमाल होने वाले रंग और केमिकल की गुणवत्ता, ब्रांड व मात्रा की भी जांच की गई। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मौके पर कई मिलावटी खाद्य पदार्थों को नष्ट भी किया। इस अभियान में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी डॉ. पवन कुमार, अमित राम, नम्रता महतो और मनीष सौरभ सहित अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।
मिलावटखोरों पर नकेल कसने की मांग
मोरहाबादी वेंडर मार्केट में नियमों का उल्लंघन करने वाले स्टॉल संचालकों पर 500 रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही गई है। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों और जानकारों का मानना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसे गंभीर मामलों में यह जुर्माना कुछ नहीं है। स्थानीय लोगों ने खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नियमित और सख्त कार्रवाई की मांग की है। एक महिला ने तो इस बात पर जोर दिया कि खाद्य पदार्थों की आपूर्ति करने वाले मूल स्रोतों की भी गहराई से जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। चूंकि ये लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ का मामला है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाइयां
राजधानी में मिलावटखोरी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रशासन द्वारा कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। बीते 6 अगस्त 2026 को रातु रोड में 800 किलो से अधिक मिलावटी पनीर और खोवा जब्त किया गया था, जिसे बाद में नष्ट कर दिया गया था। वहीं, जुलाई 2025 में भी ओरमांझी में 560 किलो पनीर, 20 किलो क्रीम और 20 किलो घी की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बावजूद मिलावटखोरों के बेखौफ होने से स्ट्रीट फूड की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


