पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल पहुंची पीड़िता
बुधवार दोपहर महिला थाना प्रभारी एवं मामले की जांच अधिकारी हेमा कुमारी पुलिस बल के साथ पीड़िता को सदर अस्पताल लेकर पहुंचीं। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने आवश्यक मेडिकल जांच की। जानकारी के अनुसार, टीम में दो महिला रोग विशेषज्ञ, एक दंत चिकित्सक, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र के एक रेडियोलॉजिस्ट शामिल थे। जांच पूरी होने के बाद भी मेडिकल रिपोर्ट के निष्कर्षों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पहले किया था इनकार, बाद में मेडिकल जांच के लिए हुई तैयार
मेडिकल जांच से पहले पीड़िता के इनकार और बाद में सहमति देने को लेकर मामले में चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, गांव स्तर पर पहल के बाद पीड़िता और उसके परिजन जांच कराने के लिए तैयार हुए। हालांकि, इस बदलाव के पीछे की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सिविल सर्जन पर तीन बार यौन शोषण का आरोप
मामले में पीड़िता हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली है। उसने अपने आवेदन और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), हजारीबाग के समक्ष दिए गए बयान में आरोप लगाया था कि करीब दो महीने के भीतर सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने तीन बार उसका यौन शोषण किया।
शिकायत के आधार पर महिला थाना में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने आरोपी सिविल सर्जन को गिरफ्तार किया। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही हो सकेगी।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य होने का किया दावा
पुलिस ने पहले मामले में पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध होने की बात कही थी। अब मेडिकल जांच के निष्कर्षों के साथ पीड़िता के बयान और अन्य संभावित साक्ष्यों का मिलान जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। अस्पताल में बुधवार को पीड़िता की ओर से कुछ अन्य गंभीर आरोप लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शालिनी गुप्ता ने एसपी से मिलकर सौंपा ज्ञापन
मामले को लेकर पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेता शालिनी गुप्ता ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष से मुलाकात की। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की।
शालिनी गुप्ता ने कहा कि नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में सभी तथ्यों और साक्ष्यों की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने जांच को किसी भी बाहरी दबाव या प्रभाव से मुक्त रखने पर जोर दिया।
डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और पीड़िता की निजता पर जोर
शालिनी गुप्ता ने मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसकी पहचान गोपनीय रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘न निर्दोष फंसे, न दोषी बचे’
शालिनी गुप्ता ने कहा कि जांच ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी निर्दोष को झूठा न फंसाया जाए और यदि कोई दोषी है, तो उसे कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जा सके। उन्होंने इस मामले को महिला सुरक्षा, कानून के शासन और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़ा बताया।
फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण और मेडिकल रिपोर्ट के आधिकारिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। जांच पूरी होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
- पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल पहुंची पीड़िता
- पहले किया था इनकार, बाद में मेडिकल जांच के लिए हुई तैयार
- सिविल सर्जन पर तीन बार यौन शोषण का आरोप
- पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य होने का किया दावा
- शालिनी गुप्ता ने एसपी से मिलकर सौंपा ज्ञापन
- डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और पीड़िता की निजता पर जोर
- ‘न निर्दोष फंसे, न दोषी बचे’


